बिहार में अनुदानित संस्कृत विद्यालयों पर कसेगा शिकंजा, वेतन में गड़बड़ी पर होगी FIR – शिक्षा विभाग ने जारी किया आदेश
पटना – 25 अक्टूबर। बिहार के अराजकीय प्रस्वीकृत अनुदानित संस्कृत विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मियों के लिए बड़ी खबर है। राज्य सरकार ने अब इन विद्यालयों के वेतन भुगतान में हो रही कथित धांधली की व्यापक जाँच का आदेश दिया है।
शिक्षा विभाग (माध्यमिक शिक्षा निदेशालय) के विशेष निदेशक सचिन्द्र कुमार ने पत्रांक 2398 दिनांक 21.10.2026 के द्वारा सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को इस संबंध में सख्त निर्देश जारी किया है।
क्या है पूरा मामला?
शिक्षा विभाग ने यह कदम वित्त विभाग, बिहार सरकार के पत्रांक 9544 दिनांक 09.10.2026 के आलोक में उठाया है। वित्त विभाग ने शिक्षा विभाग के अंतर्गत सभी शिक्षक/शिक्षकेत्तर कर्मियों के वेतन एवं भत्तों की जाँच अनिवार्य रूप से करने का निर्देश दिया था। इसी के तहत अब अनुदानित संस्कृत विद्यालयों को टारगेट किया गया है।
क्या-क्या जाँचा जाएगा?
पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि जिला शिक्षा पदाधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि शिक्षक/कर्मी की नियुक्ति और उसका अनुमोदन वैध है या नहीं। विद्यालय वास्तव में अनुदान पाने की अहर्ता रखता है या नहीं। वेतन एवं भत्तों की अनुमान्यता सही है या नहीं। सही संस्थान के सही कर्मी को ही नियमानुसार वेतन का भुगतान हो रहा है या नहीं।
गड़बड़ी मिली तो होगी आपराधिक कार्रवाई—
सरकार ने सख्त लहजे में कहा है कि यदि वेतन भुगतान में किसी प्रकार की अनियमितता संज्ञान में आती है, तो संबंधित पदाधिकारी/कर्मी को चिन्हित कर उनके विरुद्ध विधिसम्मत आपराधिक एवं अनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
माना जा रहा है कि कई जिलों से फर्जी नियुक्ति और बिना विद्यालय आए वेतन लेने की शिकायतें मिलने के बाद सरकार ने यह बड़ा कदम उठाया है।

