
बिहार की सबसे दुर्लभ मूर्ति गायब! देवहार मंदिर से विष्णु, दुर्गा समेत 3 प्राचीन प्रतिमाएं रहस्यमय ढंग से लापता
मधुबनी में 1500 साल पुराना इतिहास चोरी! देवहार के मुक्तेश्वर मंदिर से गुप्तकालीन विष्णु मूर्ति गायब, अमेरिका से आए थे वैज्ञानिक देखने, इंटैक ने खोली पोल – मधुबनी के देवहार में मिटाया जा रहा मिथिला का इतिहास, 12वीं सदी की दुर्गा और गुप्तकाल की विष्णु मूर्ति गायब, DM-SP से FIR की मांग, मिथिला की पंजी जहां से शुरू हुई, वहीं से भगवान गायब! मुक्तेश्वर धाम से डेढ़ हजार साल पुरानी विष्णु प्रतिमा चोरी, घंटी तक नहीं छोड़ी, तालाब से निकली चमत्कारी विष्णु मूर्ति रातों-रात गायब, खजाना एक्ट में होगी कार्रवाई?
मधुबनी, 23 अक्टूबर। मधुबनी जिला के अंधराठाढ़ी थाना अंतर्गत देवहार गांव स्थित ऐतिहासिक मुक्तेश्वर महादेव मंदिर से विष्णु की दुर्लभ मूर्ति, महिषासुरमर्दिनी दुर्गा की प्रतिमा एवं विष्णु प्रतिमा की पादपीठ को कुछ स्वार्थी तत्वों द्वारा गायब कर दिया गया है। इस संबंध में इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (इंटैक), बिहार राज्य के को-कन्वेनर डॉ. शिव कुमार मिश्र ने मधुबनी के जिला पदाधिकारी एवं आरक्षी अधीक्षक से दोषियों पर प्राथमिकी दर्ज कर विधिसम्मत कार्रवाई की मांग की है।

डॉ. मिश्र ने जिला पदाधिकारी को लिखे पत्र में कहा है कि वर्ष 2016 में मुक्तेश्वर महादेव मंदिर के पश्चिम स्थित एक छोटी तालाब से एक भग्न मूर्ति मिली थी। यह विष्णु भगवान की दुर्लभ प्रतिमा थी जो गुप्तकालीन राजाओं के समय की अर्थात लगभग डेढ़ हजार साल पुरानी थी। इस पर अनुसंधान करने के लिए वर्ष 2017 में अमेरिका के प्रसिद्ध आर्ट हिस्टोरियन एवं नॉर्थ वेस्टर्न यूनिवर्सिटी, शिकागो के एमेरिटस प्रोफेसर डॉ. रॉब लिनरौथ आए थे। राज्य में इस तरह की विष्णु प्रतिमा अब तक नहीं मिली थी।

इसके अलावा शिव मंदिर से पूरब स्थित एक टीले से महिषासुरमर्दिनी दुर्गा की मूर्ति मिली थी जो मिथिला के कर्णाटवंशी राजाओं के समय अर्थात 12वीं-13वीं शताब्दी की थी। साथ ही शिव मंदिर के सामने के तालाब की उराही में विष्णु प्रतिमा की एक पादपीठ मिली थी जिस पर विष्णु, लक्ष्मी एवं सरस्वती के पैरों के अवशेष बचे हुए थे। इन सभी दुर्लभ पुरावशेषों को मंदिर के पंडों द्वारा गायब कर दिया गया है।
डॉ. मिश्र ने बताया कि मुक्तेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास अत्यंत महत्वपूर्ण एवं प्राचीन है। मिथिला की प्रसिद्ध पंजी प्रबंध की शुरुआत यहीं से कर्णाटवंशी राजा हरसिंहदेव द्वारा की गई थी। प्राचीन शिवलिंग को यहां के लोगों द्वारा नष्ट कर दिया गया है और अब दुर्लभ मूर्तियां भी गायब कर दी गई हैं। इस स्थान की ऐतिहासिकता एवं संस्कृति को मिटाने का कुकृत्य किया गया है। यह अपराध अक्षम्य है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर में घंटी आदि चढ़ावों को भी पंडों द्वारा गायब कर दिया गया है।
नियमानुसार इन मूर्तियों को सरकारी संग्रहालय में जमा किया जाना चाहिए था। इससे इस क्षेत्र का इतिहास सुरक्षित रहता। इंडियन ट्रेजर ट्रोव एक्ट 1878 एवं बिहार पुलिस मैनुअल 1978 के आलोक में ऐसे पुरावशेषों को सुरक्षित रखने हेतु सरकारी संग्रहालय में जमा किया जाना चाहिए। जिला कलेक्टर एवं पुलिस प्रशासन का यह दायित्व है कि ऐसे पुरावशेषों को सुरक्षित रखने हेतु सरकारी संग्रहालय में जमा कराएं।
डॉ. मिश्र ने जिलाधिकारी से आग्रह किया है कि मुक्तेश्वर महादेव मंदिर, देवहार के इतिहास एवं संस्कृति के साक्ष्य को मिटाने तथा पुरावशेषों को गायब करने के अपराध के लिए अविलंब प्राथमिकी दर्ज करने हेतु संबंधित पदाधिकारी को निर्देशित किया जाए एवं मूर्तियों को गायब करने वालों पर विधिसम्मत कार्रवाई की जाए। आवेदन की प्रतिलिपि निदेशक, पुरातत्व निदेशालय, बिहार सरकार एवं थाना प्रभारी, अंधराठाढ़ी को भी प्रेषित की गई है।



