
‘भारत का लाभ, मानवता का लाभ’, नवाचार किसी एक देश की जागीर नहीं : उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन
नई दिल्ली, 23 अक्टूबर। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा है कि नवाचार और नई टेक्नोलॉजी का फायदा पूरी मानवता को मिलना चाहिए, न कि किसी एक देश तक सीमित रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि ‘भारत का लाभ, मानवता का लाभ है’ और 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य केवल आकांक्षा नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है। उपराष्ट्रपति शुक्रवार को उपराष्ट्रपति भवन में अनिल के. एंटनी की पुस्तक ‘एडवांटेज इंडिया : रीशेपिंग द फ्यूचर फॉर एन इक्विटेबल वर्ल्ड’ के विमोचन समारोह में बोल रहे थे।
25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर, 3 करोड़ लखपति दीदी बनीं—
राधाकृष्णन ने कहा कि भारत की सभ्यतागत विरासत, लोकतंत्र, युवा आबादी, मजबूत संस्थान और तकनीकी क्षमता देश की ताकत हैं। पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 25 करोड़ से अधिक लोग अत्यधिक गरीबी से बाहर निकले हैं। शिक्षा, आवास, स्वच्छता, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा की योजनाओं ने गरिमा और सुरक्षा बढ़ाई है। उन्होंने कहा कि समावेशी विकास में महिलाओं, युवाओं और किसानों की केंद्रीय भूमिका है। 3 करोड़ से अधिक लखपति दीदी बनना महिला नेतृत्व वाले विकास का उदाहरण है। IIT, AIIMS, मेडिकल कॉलेज, वंदे भारत, हवाई अड्डे और हाईवे से देश का इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत हुआ है।
AI से डरने की नहीं, नेतृत्व की जरूरत—
उपराष्ट्रपति ने कहा कि जैसे कभी कंप्यूटर को लेकर आशंका थी और भारत IT पावर बन गया, वैसे ही AI और मशीन लर्निंग भारत के लिए बड़ा अवसर हैं। आत्मनिर्भर भारत के तहत स्वदेशी पोत ‘INS समर्थक’* का नौसेना में शामिल होना रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता का प्रमाण है।
वसुधैव कुटुम्बकम सिर्फ नारा नहीं—
भारत की वैश्विक भूमिका पर उन्होंने कहा कि G-20 अध्यक्षता के दौरान भारत ने ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना को आगे बढ़ाया, अफ्रीकी संघ को G-20 में शामिल कराया और ग्लोबल साउथ की आवाज बना। कोविड में 100 से अधिक देशों को वैक्सीन देकर भारत ने मानवता की सेवा की।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लिए ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना से हर नागरिक की भागीदारी जरूरी है। यह किताब युवाओं को टेक्नोलॉजी, नीति और राष्ट्र निर्माण से जोड़ेगी। समारोह में प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय सूद, अर्थशास्त्री डॉ. शमिका रवि, लेखक अनिल के. एंटनी और रूपा पब्लिकेशंस के प्रबंध संपादक कपिश मेहरा मौजूद रहे



