बिहार
MADHUBANI:- गैभोट अवस्था में पहुंची धान की फसल, अब पोषण और गंधी कीट की निगरानी जरूरी
मधुबनी- 07 अक्टूबर। जिले में धान की फसल अब गैभोट यानी बालियां निकलने की अवस्था में पहुंच रही है। मधेपुर, बाबूबरही, रहिका, बिस्फी, फुलपरास और बासोपट्टी समेत प्रमुख धान उत्पादक प्रखंडों के कई खेतों में बालियां निकलने लगी हैं। इस बीच कुछ खेतों में निचली पत्तियां पीली पड़ने और फसल की बढ़वार को लेकर किसान चिंतित हैं। किसानों का कहना है कि फसल में पहले ही कई बार खाद, पोषक तत्व और कीटनाशकों का प्रयोग किया जा चुका है। ऐसे में गैभोट अवस्था में अब क्या दिया जाए और किन दवाओं का छिड़काव किया जाए, इसे लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
किसान बोले- कई बार खाद व दवा दे चुके, अब क्या करें—
नाजिरपूर के किसान फिरोज आलम ने बताया कि 22 जुलाई को रोपाई के समय डीएपी,यूरिया, फिप्रोनिल और 16 प्रतिशत वाले बायोपोटाश का प्रयोग किया गया था। इसके बाद 24 अगस्त को यूरिया, बायोपोटाश और बायोजाइम पावर प्लस दिया गया। सितंबर के पहले सप्ताह में क्रॉप प्लस, एनपीके, प्रोफेनोफॉस+साइपरमेथ्रिन तथा एजोक्सीस्ट्रोबिन+डिफेनोकोनाजोल का छिड़काव किया गया। अब फसल गैभोट अवस्था में पहुंच गई है। किसानों की चिंता है कि इस अवस्था में कौन-सा पोषक तत्व फसल के लिए लाभकारी होगा और किन दवाओं या पोषक तत्वों को एक साथ मिलाकर छिड़काव करने से बचना चाहिए।
बालियां निकलते ही करें गंधी कीट की निगरानी—
धान में बालियां निकलने के साथ ही गंधी कीट की निगरानी बेहद जरूरी हो जाती है। यह रस चूसक कीट बालियों से रस चूसकर दानों के भराव और गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है। किसानों को सुबह-शाम खेत में जाकर बालियों की जांच करने की सलाह दी गई है। कीट का प्रकोप दिखाई देने पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार अनुशंसित कीटनाशी का प्रयोग किया जा सकता है।
बसैठा कृषि विज्ञान केंद्र के मंगला नंद झा ने बताया कि गैभोट अवस्था में धान की फसल को जरूरत से ज्यादा नाइट्रोजन देने से बचना चाहिए। बालियों के विकास के लिए फास्फेट और पोटाश का पानी में घोल बनाकर छिड़काव किया जा सकता है। इससे इस अवस्था में फसल को आवश्यक पोषण मिल सकता है।
उन्होंने बताया कि पौधों को अतिरिक्त ताकत देने और अच्छी परागण प्रक्रिया में मदद के लिए क्रॉप प्लस का प्रयोग किया जा सकता है। इसके बाद बिना आवश्यकता के कई प्रकार के पोषक तत्वों या कीटनाशकों को एक साथ मिलाकर छिड़काव करने की जरूरत नहीं है। किसानों को फसल की स्थिति और कीट-रोग के प्रकोप के आधार पर ही कृषि विशेषज्ञ की सलाह से दवा का प्रयोग करना चाहिए।



