
बिहार में लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए जन सुराज के शिक्षक व स्नातक प्रत्याशियों को विजयी बनाएं : प्रशांत किशोर
नवादा- 07 अक्टूबर। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार में लोकतंत्र की वास्तविक स्थापना और व्यवस्था में बदलाव के लिए जाति व धर्म से ऊपर उठकर मतदान करने की जरूरत है। उन्होंने स्नातक एवं शिक्षक मतदाताओं से जन सुराज के पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के प्रत्याशी डॉ. अनुज सिंह तथा पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की प्रत्याशी डॉ. दिव्या ज्योति को विजयी बनाने की अपील की। प्रशांत किशोर बुधवार को नवादा में आयोजित स्नातकों एवं शिक्षकों की महती सभा को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि बिहार में लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए एनडीए के प्रत्याशियों को हराकर जन सुराज के प्रत्याशियों को जीत दिलाना जरूरी है। उनके अनुसार जन सुराज का नेतृत्व जनहित को प्राथमिकता देने वाली व्यवस्था स्थापित करने के लिए संघर्ष कर रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता को जाति और धर्म के आधार पर राजनीति से ऊपर उठकर शिक्षा, रोजगार और विकास के मुद्दों पर मतदान करना चाहिए।
प्रशांत किशोर ने विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि मतदाताओं ने नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार के नाम पर मतदान किया था, लेकिन बाद में सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाया गया। उन्होंने इसे जनभावनाओं के अनादर के रूप में बताया। उन्होंने कहा कि बिहार में लोग अक्सर कहते हैं कि प्रशांत किशोर अच्छा बोलते हैं, लेकिन चुनाव में समर्थन नहीं देते। उन्होंने मतदाताओं से कहा कि यदि बिहार का नवनिर्माण करना है तो व्यवस्था में बदलाव के लिए जन सुराज के प्रत्याशियों को समर्थन देना होगा।
उन्होंने शिक्षकों की समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि जन सुराज की सरकार बनने पर शिक्षकों को सम्मान के साथ सातवां वेतनमान दिलाने का प्रयास किया जाएगा। वित्त रहित एवं वित्तपोषित संस्थानों के शिक्षकों की समस्याओं का समाधान करने के साथ ही बचे हुए शिक्षकों के समायोजन की दिशा में भी काम किया जाएगा।
प्रशांत किशोर ने स्नातक मतदाताओं से जाति और धर्म से ऊपर उठकर मतदान करने की अपील करते हुए कहा कि जिस स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में जन सुराज का प्रत्याशी विजयी होगा, वहां 10 हजार पढ़े-लिखे युवाओं को रोजगार देने के वादे को लागू करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने बिहार में रोजगार के अवसर बढ़ाने तथा रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में पलायन कर चुके युवाओं की वापसी के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की बात कही।
उन्होंने नालंदा से जुड़े पाली भाषा के रिसर्च सेंटर को ओडिशा ले जाने के मुद्दे पर भी सरकार की आलोचना की। कहा कि बिहार की ऐतिहासिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े संस्थानों को मजबूत करने की आवश्यकता है।



