
मिथिला की पहचान पर संकट: दम तोड़ रही मधुबनी की पान खेती, किसानों ने कहा- यह शौक नहीं मजबूरी
मधुबनी- 05 अक्टूबर। मिथिला का पान जिसे कभी मधुबनी की पहचान कहा जाता था, आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। जिले में पान किसानों की बदहाली देखकर एक ही तस्वीर उभरती है कि पान की लती सूख रही है, किसान हताश हैं और नई पीढ़ी खेत छोड़कर पलायन कर रही है।
मंडी से गायब हुआ देसी पान—
मधुबनी पान मंडी में अब लोकल देसी मगही पान गायब है। बाजार में 90 प्रतिशत पान कोलकाता और बनारस से आ रहा है। देसी पान का पत्ता छोटा, तीखा और पाचक होता है, जिसकी मांग पूजा-पाठ और विवाह में आज भी बनी हुई है, लेकिन उत्पादन कम होने से बाहर से आपूर्ति करनी पड़ रही है।
सर्दी में पान को बचाना सबसे मुश्किल—
किसानों के अनुसार शीतलहर और झुलसा रोग पान के पत्तों को पूरी तरह जला देता है। सर्दी में पान को बचाना सबसे मुश्किल होता है। पान की बरेजा को तिरपाल और पुआल से ढकना पड़ता है, जिसमें हजारों रुपये की लागत आती है। एक बार झुलसा लग गया तो पूरी बरेजा बर्बाद हो जाती है।
कभी सैकड़ों परिवार करते थे खेती, अब गिने-चुने बचे
नदी के उथले होने और भू-जलस्तर गिरने से पान को रोज पानी देना महंगा हो गया है। जिले में कभी सैकड़ों परिवार पान की खेती करते थे, अब गिने-चुने ही बचे हैं।
किसान कहते हैं कि पान की खेती शौक नहीं, पुश्तैनी मजबूरी है। पान के बीज (लती) के लिए कोलकाता जाना पड़ता है, एक लती 15-20 रुपये की मिलती है। एक बरेजा तैयार करने में 50 हजार से 1 लाख रुपये तक खर्च आता है।
एक रात में डूब जाती है पूरी फसल
बाढ़ आती है तो एक रात में पूरी फसल डूब जाती है और मुआवजा तक नहीं मिलता। सरकार मखाना और धान के लिए योजना चलाती है, लेकिन पान के लिए कोई एमएसपी, बीमा या अनुदान नहीं है। किसान संतोष राउत और मनोज राउत ने बताया कि अधिकारी आते हैं, फोटो खींचते हैं, नाम लिखते हैं और चले जाते हैं। साल दर साल बाढ़ और फसल नुकसान के बाद भी आज तक क्षतिपूर्ति नहीं मिली।
मधुबनी जिले में प्रतिमाह पान का कारोबार—
जिले में अब करीब 100-200 बरेजा ही बचे हैं। एक बरेजा से प्रतिमाह औसत 10-15 हजार पत्ता निकलता है। देसी पान की थोक दर 150-250 रुपये प्रति 100 पत्ता है। इस हिसाब से जिले की कुल खेती से प्रतिमाह महज 1 से 2 लाख रुपये का ही लोकल उत्पादन होता है।
अमरेन्द्र चौरसिया ने पान खेती को उद्यान फसल में शामिल करने की उठाई मांग—
बिहार पान किसान महासंघ के अध्यक्ष अमरेन्द्र चौरसिया ने बताया कि मधुबनी शहर, जयनगर, झंझारपुर, बेनीपट्टी की पान मंडियों में 90 प्रतिशत पान कोलकाता और बनारस से आता है। जिले में 1 हजार से ज्यादा पान दुकान-गुमटी हैं। एक दुकान औसत 800-1200 रुपये रोज का पान बेचती है। इस हिसाब से पूरे जिले में पान पत्ता का प्रतिमाह करीब 15 से 20 लाख रुपए का कारोबार होने का अनुमान है। उन्होंने मांग की है कि पान को उद्यान फसल में शामिल कर अनुदान, पॉलीहाउस के लिए सब्सिडी और फसल बीमा दिया जाए, नहीं तो मिथिला में देसी पान का उत्पादन सिर्फ किताबों में रह जाएगा।



