
सम्राट सरकार का दावा फेल? मधुबनी में 1.69 करोड़ का ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक अफसरों की तिकड़म से बर्बाद
मधुबनी- 25 सितंबर। परिवहन विभाग भले ही कागजों में दावा कर रहा हो कि मधुबनी समेत राज्य के 32 जिलों में ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक (ADTT) बनकर तैयार और क्रियाशील है, लेकिन मधुबनी के गंगासागर की जमीनी हकीकत इस दावे की पोल खोल रही है।
1.69 करोड़ रुपये की लागत से बना यह ट्रैक ड्राइविंग टेस्ट के लिए नहीं, बल्कि अधिकारियों की अनदेखी और तिकड़म का शिकार होकर बर्बाद हो रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सरकार इसे ‘पूर्ण और क्रियाशील’ बता रही है, तो आखिर किसकी शह पर ट्रैक परिसर में अन्य गतिविधियां चल रही हैं और ट्रैक को हैंडओवर क्यों नहीं लिया गया?
सूत्रों के अनुसार, विभाग ने टेस्टिंग स्टाफ के लिए जो भवन बनाया था, उस पर स्थानीय लोगों ने कब्जा कर निजी उपयोग शुरू कर दिया है। अधिकारियों द्वारा जानबूझकर ट्रैक को तकनीकी रूप से ‘अनुपयोगी’ बताकर हैंडओवर में देरी की जा रही है, जिसका फायदा उठाकर निजी इस्तेमाल हो रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह ट्रैक पहले से ही विवादित जमीन पर बना है और लगातार उपेक्षा के चलने से इसकी संरचना पूरी तरह खराब हो जाएगी।
ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर 1.69 करोड़ की सरकारी संपत्ति की बर्बादी का खेल किसके इशारे पर चल रहा है? क्या यही है सरकार की पारदर्शी लाइसेंस व्यवस्था? यह मामला अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है।



