
IDBI बैंक के निजीकरण के खिलाफ देशभर में 2 दिवसीय हड़ताल, पटना के गर्दनीबाग में 48 घंटे की भूख हड़ताल
पटना, 04 नवंबर। यूनाइटेड फोरम ऑफ आईडीबीआई ऑफिसर्स एंड एम्पलाइज (UFIOE) के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर 02 और 03 नवंबर को देशभर की 2,000 से अधिक शाखाओं में कार्यरत 10,000 से अधिक अधिकारी व कर्मचारी दो दिवसीय पूर्ण औद्योगिक हड़ताल पर रहे।
इस राष्ट्रव्यापी आंदोलन के तहत राजधानी पटना में AIIDBIOA (पटना ज़ोन) के तत्वावधान में बैंक के अधिकारी एवं कर्मचारी ऐतिहासिक गर्दनीबाग धरना स्थल पर 48 घंटे की अखंड भूख हड़ताल एवं विशाल महा-धरना आयोजित कर रहे हैं। इस दौरान संगठन के प्रमुख पदाधिकारी निरंतर 48 घंटे के उपवास पर बैठेंगे तथा बिहार व झारखंड क्षेत्र से लगभग 300 बैंक अधिकारी धरना स्थल पर उपस्थित रहकर सरकार के फैसले का पुरजोर विरोध दर्ज करा रहे हैं।
संगठन का कहना है कि कठिन दौर के बाद कर्मचारियों की जी-तोड़ मेहनत तथा करदाताओं व एलआईसी पॉलिसीधारकों के ₹46,000 करोड़ से अधिक के सहयोग से आईडीबीआई बैंक पुनर्जीवित हुआ है। बैंक ने पिछले छह वर्षों में ₹30,106.43 करोड़ का शुद्ध लाभ अर्जित किया है। इसका ग्रॉस एनपीए घटकर 2.30% और नेट एनपीए मात्र 0.16% रह गया है। ऐसे शानदार प्रदर्शन करने वाले बैंक का नियंत्रण कनाडा के फेयरफ़ैक्स समूह को औने-पौने दाम पर सौंपना राष्ट्रीय हित और वित्तीय संप्रभुता के साथ खुला खिलवाड़ है।
संगठन ने आरोप लगाया कि वर्ष 2003 में संसद के दोनों सदनों में सरकार ने आश्वासन दिया था कि आईडीबीआई बैंक में 51% सरकारी हिस्सेदारी सदैव बरकरार रहेगी। इस वादे को तोड़ना देश और संसद की गरिमा पर आघात है।
बैंक के निजीकरण से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और दिव्यांगजन कर्मियों को मिलने वाला संवैधानिक आरक्षण समाप्त हो जाएगा तथा आम जनता, छोटे किसानों व एमएसएमई को मिलने वाली सुलभ वित्तीय सेवाएं प्रभावित होंगी।



