
जुड़शीतल पर हुई पूजा-अर्चना, बुजुर्गों से मिला ‘जुड़ायल रहु’ का आशीष
मधुबनी- 15 अप्रैल। मिथिला का लोक पर्व जुड़शीतल पर्व काफी हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। घर के बड़े-बुजुर्ग मंदिरों में पूजा-अर्चना बाद छोटों के सिर पर चुल्लू से पानी डाल ‘जुड़ायल रहु’ का आशीर्वाद दिया। शहर के बसुआरा स्थित कौशल किशोर मंडल के रामजानकी मंदिर पर सीमा कुमारी ने बच्चों, युवा के सिरपर जल देकर जुड़शीतल की पारंपरिक परंपरा को पूरा किया। मौके पर पूजा-अर्चना की गई। कौशल किशोर मंडल ने कहा कि आज के दिन बच्चों के सिर पर शीतल जल देकर सालभर शीतलता का आशीर्वाद दिया जाता है।
नझइधर, विभिन्न मंदिरों पर महिलाओं को पूजा-अर्चना के बाद मंदिर पर आने वाले छोटे-छोटे बच्चों के सिर पर जल देकर आशीष देते हुए देखा गया। जुड़शीतल के दिन अधिकांश घरों में सुबह बाद चूल्हा नहीं जलया गया। सुबह में दिन और रात्रि का भोजन बनाने के बाद चूल्हा की पूजा की गई। भोजन में भात, पूरी, खीर के अलावा तरह-तरह के व्यंजनों के साथ चना बेसन और दही से तैयार कढ़ी बनाए गए। लोगों ने सुबह में पेड़-पौधों को जल दिया। इधर, जुड़शीतल के दिन पितरों के लिए जल से भरे मिट्टी के पात्र लटकाए गए। छिद्र वाले मिट्टी के पात्र से समाधि पर जल का प्रवाह होता रहा है। वहीं, जुडशीतल के दिन धुरखेल की परंपरा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग नदी, तालाब, कुआं व अन्य जलस्रोतों के पास एकत्रित होकर एक-दूसरे पर जल के साथ ही तलहटी में जमे कीचड़ को फेंककर लोग धुरखेल का आनंद उठाया।



