
शिव शक्ति महायज्ञ का उद्देश्य समाज में सुख, शांति और समृद्धि : शरत चंद्र मिश्रा
मधुबनी- 01 जून। जिले के रहिका प्रखंड के कपिलेश्वर स्थान परिसर में 19 जून से प्रस्तावित शिव शक्ति महायज्ञ की तैयारी जोरों से चल रही है। यज्ञ स्थल पर यज्ञ मंडप का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है।
यज्ञ ज्योति चैरिटेबल ट्रस्ट के शरत चंद्र मिश्रा ने बताया कि शिव शक्ति महायज्ञ का उद्देश्य समाज में सुख, शांति और समृद्धि होता है। शास्त्रों के अनुसार सबसे पहले राजा दक्ष प्रजापति ने शिव शक्ति यज्ञ का आयोजन किया था। यज्ञ शिव और शक्ति के मिलन और उनकी असीम ऊर्जा को समर्पित माना जाता है। 9 दिवसीय शिव शक्ति महायज्ञ के पहले दिन संकल्प पूजन अनुष्ठान संपन्न किया जाएगा। यज्ञ मंडप पर आचार्य के नेतृत्व में विघ्न विनाश गणपति माता पार्वती, भगवान शिव और विभिन्न देवी-देवताओं का आह्वान किया जाएगा। यजमानों को संकल्प पूजन के साथ ईष्टदेवों को आमंत्रण दिया जाएगा।विधि-विधान के साथ यज्ञशाला को जागृत किया जाएगा। आचार्यो और यजमानों की टोली मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ मंडप का परिभ्रमण करेंगे।
उन्होंने बताया कि शिवशक्ति यज्ञ के दौरान 19 से 27 जून तक प्रतिदिन शाम में शिव महापुराण कथा का वाचन सुप्रसिद्ध कथा वाचिका साध्वी मीरा किशोरी द्वारा किया जाएगा। महायज्ञ में पार्थिव शिवलिंग की विशेष पूजा की जाएगी। मिट्टी के शिवलिंग बनाना और इसकी पूजा से जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति (मोक्ष) प्राप्त होती है। शिव शक्ति महायज्ञ में पार्थिव शिवलिंग बनाने जैसे पवित्र कार्य में अधिक से अधिक लोगों को भाग लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि महायज्ञ में पार्थिव शिवलिंग का पूजन करने का महात्म्य सामान्य दिनों से कई गुना अधिक होता है।
स्कंद पुराण, लिंग पुराण और शिव महापुराण में पार्थिव शिवलिंग पूजा से अखंड सौभाग्य, रोग मुक्ति, धन-धान्य और अकाल मृत्यु से रक्षा का वरदान प्राप्त होने का उल्लेख मिलता है।भगवान श्रीराम ने लंका पर विजय प्राप्त करने से पहले समुद्र किनारे रामेश्वरम में पार्थिव शिवलिंग की पूजा की थी। मिट्टी से शिवलिंग का निर्माण और पूजन करने से सभी सांसारिक और आध्यात्मिक इच्छाएं पूरी होती हैं। कुंडली में स्थित सूर्य, चंद्रमा, राहु-केतु से जुड़े दोषों को शांत करने के लिए यह पूजा प्रभावशाली होता है। घर में सुख-शांति आती है, आपसी प्रेम बढ़ता है। असाध्य रोगों से मुक्ति मिलती है।



