
शारदीय नवरात्र विशेष: 9 दिन- 9 देवी- 9 वरदान अनीता नारायण से जानें देवी की पूजा से क्या मिलता फल
मधुबनी- 08 अक्टूबर। नवरात्र में माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा को नवदुर्गा पूजा कहा जाता है। देवी भागवत पुराण के अनुसार 9 दिन तक 9 रूपों की आराधना से नवग्रह शांत होते हैं। घर में सुख-शांति आती है। भारतीय ज्योतिष परिषद की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डा. अनीता नारायण के अनुसार शास्त्रों में कहा गया है कि पहले तीन दिन मां तमस का नाश करती हैं, अगले तीन दिन रजस को नियंत्रित करती हैं। अंतिम तीन दिन सत्व गुण की वृद्धि करती हैं। इसलिए 9 दिन की सच्चे मन से की गई पूजा से भक्तों का जीवन शुद्ध और सफल होता है।
1. पहला दिन – माँ शैलपुत्री – मन की मजबूती
मां शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं। वृषभ पर सवार, एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे में कमल। यह वनस्पतियों और औषधियों की स्वामिनी हैं। नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना के साथ इनकी पूजा होती है। इनकी पूजा से चंद्र दोष शांत होता है। मन मजबूत होता है। भोग – गाय के घी से बनी वस्तु। मंत्र – ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः।
2. दूसरा दिन – माँ ब्रह्मचारिणी – ज्ञान और तप
तपस्या का प्रतीक। सफेद वस्त्र, हाथ में जप माला और कमंडल। इन्होंने भगवान शिव को पाने के लिए हजारों वर्षों तक घोर तप किया था। विद्यार्थियों और तपस्वियों के लिए इनकी पूजा उत्तम मानी जाती है। जिससे ज्ञान, वैराग्य, संयम की प्राप्ति होती है। भोग – शक्कर और पंचामृत।
3. तीसरा दिन – माँ चंद्रघंटा – भय से मुक्ति
इनके माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित है। 10 भुजाओं में अस्त्र-शस्त्र। इनके घंटे की भयानक ध्वनि से राक्षस, प्रेत बाधा दूर भागती है। इनकी पूजा से साधक को निर्भयता, वीरता प्राप्त होती है। मिथिला में मान्यता है कि इनकी पूजा से पारिवारिक कलह शांत होती है। भोग – दूध से बनी मिठाई।
4. चौथा दिन – माँ कूष्मांडा – स्वास्थ्य और समृद्धि
मान्यता है कि इन्होंने अपनी हल्की सी मुस्कान से इस ब्रह्मांड की रचना की थी। अष्टभुजा वाली देवी शेर पर सवार हैं। इनकी पूजा से आयु, यश, स्वास्थ्य और समृद्धि बढ़ती है। जो लोग हमेशा बीमार रहते हैं, उन्हें इस दिन विशेष पूजा करनी चाहिए। भोग – मालपुआ।
5. पांचवा दिन- माँ स्कंदमाता – संतान सुख
भगवान कार्तिकेय जिनका एक नाम स्कंद भी है, उनकी माता होने के कारण इन्हें स्कंदमाता कहा जाता है। गोद में बालक स्कंद। यह संतान सुख और मोक्ष दोनों देने वाली हैं। इस दिन व्रत रखकर पूजा करते हैं। भोग – केला।
6. छठा दिन- माँ कात्यायनी – विवाह बाधा दूर
महर्षि कात्यायन की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर उनकी पुत्री के रूप में जन्म लिया। यह रूप सबसे उग्र और फलदायी माना जाता है। श्रीमद् भागवत में उल्लेख है कि ब्रज की गोपियों ने श्रीकृष्ण को पति रूप में पाने के लिए इनकी ही पूजा की थी। भोग – शहद।
7. सातवां दिन- माँ कालरात्रि – शत्रु बाधा से रक्षा
काला वर्ण, बिखरे हुए बाल, गले में माला और गर्दभ पर सवारी। देखने में भयानक लेकिन शुभंकरी हैं। यह अकाल मृत्यु, तंत्र-मंत्र और शत्रु बाधा से बचाती हैं। इनकी पूजा से सारे नकारात्मक ग्रह शांत हो जाते हैं। भोग – गुड़।
8. आठवां दिन- माँ महागौरी – पाप से मुक्ति
गौर वर्ण, श्वेत वस्त्र धारण करने वाली। भगवान शिव को पाने के लिए इन्होंने कठोर तप किया था जिससे इनका शरीर काला पड़ गया था, फिर शिव जी ने गंगा जल से धोकर गौर वर्ण दिया। इनकी पूजा से पाप धुल जाते हैं। इस दिन महा-अष्टमी पर कन्या पूजन का विशेष महत्व है। भोग – नारियल।
9. नौवां दिन- माँ सिद्धिदात्री – सभी मनोकामना पूर्ण
सभी 8 सिद्धियों- अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व, वशित्व और 9 निधियों को देने वाली। कमल पर विराजमान, चार भुजाओं वाली। इनकी पूजा के बाद ही नवरात्र की पूजा पूर्ण मानी जाती है। इनसे ज्ञान, यश और मोक्ष की प्राप्ति होती है। भोग- तिल का हलवा।



