
विश्व पशु कल्याण दिवस पर संगोष्ठी, महंत रत्नेश्वर दास बोले- बेजुबानों की सेवा ही सच्ची मानवता
मधुबनी- 04 अक्टूबर। विश्व पशु कल्याण दिवस पर पशु पालकों के बीच संगोष्ठी आयोजित की गई। पशु पालक समिति के अध्यक्ष महंत रत्नेश्वर दास ने कहा कि यह दिवस सिर्फ एक दिन नहीं, बल्कि जीवों के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक है। आज सड़कों पर प्लास्टिक खाकर गायें मर रही हैं, कुत्तों के साथ क्रूरता हो रही है और जंगलों के कटने से वन्यजीव बेघर हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि वेदों में ‘अहिंसा परमो धर्मः’ और ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ का संदेश सभी प्राणियों के लिए है। भारत में गाय को माता, हाथी को गणेश और नाग को शिव का प्रतीक माना गया है, इसलिए पशुओं की रक्षा सांस्कृतिक जिम्मेदारी भी है। उन्होंने लोगों से घर के बाहर पशु-पक्षियों के लिए पानी और चारे की व्यवस्था करने, प्लास्टिक का उपयोग बंद करने और पशु क्रूरता के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की। कहा कि जिस समाज में बेजुबानों की रक्षा होती है, वही सच्चा सभ्य समाज है।



