
दरभंगा स्नातक में सर्वेश की हार सिर्फ एक सीट की हार नहीं, मिथिला में BJP के लिए 3 बड़े खतरे का सिग्नल
दरभंगा, 29 अक्टूबर। दरभंगा स्नातक विधान परिषद सीट पर भाजपा के कद्दावर MLC सर्वेश कुमार की 533 वोट से हार ने सिर्फ एक सीट नहीं छीनी, बल्कि मिथिला की सियासत में भाजपा के लिए 3 बड़े संदेश दे दिए हैं।
ग्रेजुएट वोटर = BJP का कोर वोटर, वही खिसका:
पिछले 10 साल से BJP शिक्षक और स्नातक सीटों को अपनी सबसे सुरक्षित सीट मानती थी। माना जाता था कि पढ़ा-लिखा, शहरी, सवर्ण वोटर BJP का पक्का वोटर है। लेकिन दरभंगा में 63,820 स्नातक वोटरों में से 21,929 ने RJD के अनिल झा को चुना। मतलब, पढ़े-लिखे वर्ग का भरोसा हिला है।
MY + बुद्धिजीवी समीकरण फिर जिंदा:
काउंटिंग शीट साफ बताती है कि जन सुराज के इम्तियाज नूरानी समेत अल्पसंख्यक उम्मीदवारों के 8 हजार वोटों की दूसरी वरीयता सीधे RJD को ट्रांसफर हुई। पटना शिक्षक के बाद दरभंगा स्नातक की जीत ने साबित किया कि तेजस्वी का A टू Z के साथ MY फैक्टर स्नातक सीटों पर भी काम कर रहा है।
2025 से पहले मिथिला में संगठन पर सवाल:
मधुबनी, दरभंगा, सुपौल में BJP का संगठन सबसे मजबूत माना जाता था। 50 घंटे की काउंटिंग में BJP पहले राउंड में लीड लेकर भी आखिरी राउंड में 533 वोट से हार गई। इससे साफ है कि दूसरी वरीयता का मैनेजमेंट और बूथ लेवल पर स्नातक वोटरों से संपर्क में BJP फेल रही।
RJD इसे 2025 विधानसभा चुनाव से पहले का सेमीफाइनल बता रही है। मिथिला में 40 से ज्यादा विधानसभा सीटें हैं। यहां स्नातक मतदाता हर विधानसभा में 15 से 20 हजार की संख्या में हैं, जो पूरे परिवार की राय बनाते हैं। सीधा संदेश है: स्नातक अब सिर्फ डिग्री नहीं, सत्ता बदलने का हथियार बन गया है, और इस हथियार पर अब RJD की पकड़ मजबूत होती दिख रही है।



