
संसद मार्च में बवाल: पुलिस-प्रदर्शनकारी भिड़े, 118 जवान घायल, 70 हिरासत में, हिंसा की साजिश के एंगल से जांच तेज
नई दिल्ली- 21 जुलाई। संसद के मानसून सत्र के पहले दिन राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान भारी हंगामा हुआ। जंतर-मंतर से संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कई जगह हिंसक झड़पें हुईं। जनपथ, रायसीना रोड और संसद मार्ग पर पथराव, बैरिकेड तोड़ने और तोड़फोड़ की घटनाओं के बाद पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस का सहारा लेना पड़ा। दिनभर चले हंगामे के बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर से हटा दिया लेकिन देर शाम वे फिर लौट आए। इस बीच सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके ने आंदोलन और संसद मार्च मंगलवार को भी जारी रहने का ऐलान किया।
जंतर-मंतर व उसके आसपास पिछली रात से ही इकट्ठा हो रहे प्रदर्शनकारी और उनके समर्थकों की भीड़ मंगलवार शाम तक करीब 16 हजार हो गई।प्रदर्शनकारियों ने पूरे दिन पुलिसकर्मियों को इधर से उधर भगाया। देर शाम तक एनडीएमसी भवन के पास अचानक चार हजार से ज्यादा
की भीड़ जमा हो गई। पुलिस बार-बार रोड को खाली करने का अनुरोध करती रही और लोग उग्र होते दिखे। इस बीच प्रदर्शन करने वाले लोगों ने पुलिस टीम पर पानी की बोतल भी फेंकी।
इससे पहले साेमवार काे प्रदर्शनकारियों ने बार-बार चेतावनी और कानूनी निर्देशों के बावजूद लागू धारा-163 का उल्लंघन किया। भीड़ ने पुलिस पर पथराव किया, बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। पुलिस का दावा है कि उपद्रव के दौरान 15 से 20 सरकारी वाहन क्षतिग्रस्त हुए, जबकि जनपथ इलाके में कई दुकानों में भी तोड़फोड़ की गई। हिंसा में 118 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। इनमें स्पेशल कमिश्नर, जॉइंट कमिश्नर, एडिशनल कमिश्नर, डीसीपी, एडिशनल डीसीपी और एसीपी रैंक के अधिकारी समेत पांच से अधिक आईपीएस अधिकारी शामिल हैं। कई महिला पुलिसकर्मी भी घायल हुई हैं।
वहीं, करीब 60 प्रदर्शनकारियों के भी जख्मी होने की सूचना है। घटनास्थल पर तैनात एक घायल पुलिस अधिकारी ने बताया कि क्लैरिजेस होटल के पास अचानक प्रदर्शनकारियों की ओर से पथराव शुरू हो गया। उनके मुताबिक ऐसा लगा कि पत्थरों का पहले से इंतजाम किया गया था और प्रदर्शन समाप्त होने के बाद बची भीड़ ने सुनियोजित तरीके से हिंसक रूप ले लिया।
हिंसा के बाद पुलिस ने करीब 70 लोगों को हिरासत में लिया है। सूत्रों के मुताबिक, हिरासत में लिए गए कई लोग छात्र नहीं हैं। ऐसे में पुलिस अब पूरे घटनाक्रम की सुनियोजित साजिश के एंगल से भी जांच कर रही है। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की जा रही हैं। सीसीटीवी फुटेज, सोशल मीडिया पोस्ट और मोबाइल वीडियो भी जांच के दायरे में हैं।
उधर, सड़क पर बवाल के बीच बातचीत का दौर भी चलता रहा। सीजेपी प्रतिनिधि सौरव दास और आशुतोष रांका ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से दो बार मुलाकात की। पहली बैठक में मंत्री ने उनकी मांगों का विवरण मांगा, जबकि दूसरी बैठक में प्रतिनिधियों ने लिखित ज्ञापन सौंपा। हालांकि सरकार की ओर से किसी भी मांग पर तत्काल कोई आश्वासन नहीं दिया गया। जेपी नड्डा ने आंदोलन समाप्त कर शांति बनाए रखने की अपील की।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, पूरे घटनाक्रम पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह लगातार नजर बनाए हुए थे। दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों को निर्देश दिए गए थे कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए न्यूनतम बल का इस्तेमाल किया जाए। इसके बावजूद हालात बिगड़ने पर पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी। अब राजधानी में हुई इस हिंसा की विस्तृत जांच जारी है और पुलिस का कहना है कि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।



