
केरल विधानसभा में CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग का प्रस्ताव पारित
तिरुवनंतपुरम- 12 अक्टूबर केरल विधानसभा ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग वाला एक प्रस्ताव पारित किया।
प्रस्ताव में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में गंभीर खामियों का आरोप लगाया गया और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता एवं विश्वसनीयता की रक्षा के लिए उपाय करने की मांग की गयी। केरल विधानसभा के 16वें सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन, मुख्यमंत्री वी.डी. सतीसन ने प्रस्ताव पेश किया। इसमें केंद्र सरकार से लोकतंत्र एवं संवैधानिक मूल्यों के हित में सीईसी को हटाने की प्रक्रिया शुरू करने का आग्रह किया गया।
प्रस्ताव में कहा गया है कि चुनाव आयोग को एक संवैधानिक संस्था के रूप में सरकार के प्रभाव में आए बिना, निष्पक्ष एवं स्वतंत्र रूप से अपनी ज़िम्मेदारियाँ निभानी चाहिए। इसमें यह भी कहा गया कि आयोग के कामकाज को लेकर लगे आरोपों ने उसकी निष्पक्षता और जनता के बीच उसकी विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं।
एसआईआर प्रक्रिया पर चिंता व्यक्त करते हुए, सदन ने मतदाता सूची में गड़बड़ियों को ठीक करने और उन सभी योग्य नागरिकों का मतदान अधिकार तुरंत बहाल करने की मांग की जिनके नाम हटा दिए गए थे। सदन ने चेतावनी दी कि गलतियों एवं प्रक्रियात्मक कमियों का असर अल्पसंख्यकों, प्रवासी मजदूरों, हाशिए पर रहने वाले समुदायों और युवा मतदाताओं पर बहुत ज़्यादा पड़ सकता है, जिससे उनके लोकतांत्रिक अधिकारों को नुकसान पहुंच सकता है।
इस प्रस्ताव में मतदाता सूची में सुधार की प्रक्रिया में उपयोग किये गये सॉफ़्टवेयर में कथित गड़बड़ियों और ‘फॉर्म 6’ आवेदनों में बदलाव की खबरों पर भी चिंता व्यक्त की गयी। इसमें सवाल उठाया गया कि क्या इस प्रक्रिया में मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के नियमों का पालन किया गया था और मतदाता सूची तैयार करने और उसमें सुधार करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता एवं जवाबदेही की ज़रूरत पर ध्यान दिया गया। एक और अहम मांग चुनाव आयुक्तों की चयन प्रक्रिया में बदलाव की थी।
सदन ने मांग की कि संस्थागत आज़ादी को मज़बूत करने और नियुक्ति की प्रक्रिया को ज़्यादा संतुलित बनाने के लिए, चयन समिति में प्रधानमंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता के साथ-साथ भारत के मुख्य न्यायाधीश को भी शामिल किया जाये। इस प्रस्ताव को सत्तारूढ़ कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे (यूडीएफ) और विपक्षी वाम लोकतांत्रिक मोर्चे (एलडीएफ) दोनों का समर्थन मिला।
एक सौ चालीस सदस्यीय सदन में यूडीएफ के 102 और एलडीएफ के 35 सदस्य हैं, जबकि भाजपा के तीन विधायक हैं। भाजपा ने प्रस्ताव का विरोध किया और केरल विधानसभा चुनाव रद्द करने तथा मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए संशोधन पेश किया हालांकि प्रस्तावित संशोधनों को खारिज कर दिया गया। रिपोर्टों के मुताबिक केरल देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग वाला प्रस्ताव पास किया है।
इस घटनाक्रम से चुनाव आयोग की भूमिका, कार्यपालिका से उसकी स्वतंत्रता और योग्य मतदाताओं के लिए मतदाता सूची में संशोधन के असर को लेकर चल रही राष्ट्रीय बहस और तेज़ हो सकती है। यह नया प्रस्ताव सितंबर 2025 में केरल विधानसभा की एक पहले की पहल के बाद आया है, जब उसने तत्कालीन मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन द्वारा पेश किये गये प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित किया था।
इस प्रस्ताव में चुनाव आयोग से पूरे देश में एसआईआर प्रक्रिया लागू करने के अपने फैसले को वापस लेने का आग्रह किया गया था। उस प्रस्ताव में यह आशंका व्यक्त गई थी कि संशोधन प्रक्रिया अप्रत्यक्ष रूप से राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को लागू करने में मदद कर सकती है।
16वीं केरल विधानसभा का दूसरा सत्र सोमवार को शुरू हुआ और यह 29 अक्टूबर तक चलेगा जिसमें कुल नौ बैठकें होंगी। सत्र के दौरान अन्य विधायी कार्यों में कोर्ट फीस और धार्मिक बंदोबस्त से जुड़े विधेयक शामिल हैं।



