
PATNA: अनशन कर रहे PHD अभ्यर्थियों की बड़ी जीत, राज्यपाल से वार्ता में बनी सहमति, सहायक प्राध्यापक भर्ती नियम 2026 फिलहाल स्थगित
पटना, 24 अगस्त। बिहार में सहायक प्राध्यापक भर्ती के नए नियमों के विरोध में पिछले 21 दिनों से गर्दनीबाग में अनशन कर रहे छात्रों का अनशन सोमवार को समाप्त हो गया। राज्यपाल सचिवालय, बिहार (जन-संपर्क शाखा) द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति संख्या 168/2026 के अनुसार राज्यपाल, बिहार के साथ अनशनकारी छात्रों के 6 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की 2 घंटे तक चली वार्ता के बाद सहमति बन गई है। ऑल पीएचडी होल्डर्स एंड रिसर्च एसोसिएशन के बैनर तले अनशन कर रहे छात्रों ने वार्ता के बाद अपना अनशन वापस लेने का आश्वासन दिया है।
वार्ता में 3 बड़े बिंदुओं पर बनी सहमति—
एसोसिएशन की मुख्य मांगों पर विचार करके सहायक प्राध्यापक भर्ती परिनियम, 2026 में आवश्यक संशोधन करने के बाद ही 2026 के परिनियम के आधार पर किसी भी प्रकार की नियमित या संविदा बहाली की जाएगी। तब तक इस परिनियम को स्थगित किया जाता है।.15 दिन में हाई-लेवल कमेटी का गठन : एसोसिएशन की मांगों पर विचार करने के लिए राज्यपाल, बिहार द्वारा मुख्यमंत्री से विचार-विमर्श के बाद 15 दिनों के अंदर एक समिति गठित की जाएगी। जिसमें बिहार के प्रमुख शिक्षाविद होंगे। ऐसे प्रशासकों को भी रखा जाएगा जिन्हें शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करने का अनुभव हो। समिति का गठन राज्यपाल द्वारा किया जाएगा।सहायक प्राध्यापक के लिए अधिकतम उम्र 55 वर्ष रखी जाए।बहाली के लिए लिखित परीक्षा ली जाए पर वह वस्तुनिष्ठ (Objective) हो। लिखित परीक्षा में जो उत्तीर्ण होते हैं, उनके API की गणना की जाएगी एवं लिखित परीक्षा के प्राप्तांक तथा API को जोड़कर समेकित मेरिट लिस्ट बनायी जाएगी, जिसके आधार पर इंटरव्यू के लिए निर्धारित संख्या में अभ्यर्थी बुलाये जायेंगे। इंटरव्यू में टीचिंग डेमो भी रखा जायेगा। API की गणना में मैट्रिक एवं इंटरमीडिएट के प्राप्तांकों की गणना नहीं की जाएगी। NET एवं JRF के अधिमानता को 11 तक रखा जा सकता है परन्तु पीएचडी की अधिमानता 30 से कम नहीं किया जाए। शोध प्रकाशन एवं अनुभव की गणना भी API के स्कोर में की जाएगी परन्तु शोध प्रकाशन एवं अनुभव को भलीभांति परिभाषित किया जाएगा ताकि इसमें किसी भी प्रकार का संशय न रहे। इसका कोई गलत फायदा नहीं उठा सके।
राजभवन में बनी सहमति के अनुसार अतिथि सहायक प्राध्यापकों पर समिति विचार करेगी कि अतिथि सहायक प्राध्यापकों को भी वर्तमान में बहाल हुए संविदा सहायक प्राध्यापकों की ही भांति न्यूनतम वेतनमान एवं उस पर महंगाई भत्ता दिया जाए। उनके नवीकरण (Renewal) की प्रक्रिया सभी विश्वविद्यालयों में एक समान रखी जाए। अतिथि सहायक प्राध्यापकों के शैक्षणिक प्रमाणपत्र तथा शोध पत्र एवं अनुभव की भली-भांति जांच कर ली जाए, तदोपरांत उन्हें 65 वर्षों तक कार्य करने का मौका दिया जाए। अनशनकारी छात्रों के इस सुझाव पर विचार किया गया कि अधिकतम उम्र सीमा को एक बार में नहीं घटाकर उसे धीरे-धीरे कम किया जाए। इस बीच सहायक प्राध्यापकों की बहाली नियमित रूप से प्रत्येक वर्ष रिक्तियों के विरुद्ध किया जाए।
अनशनकारी छात्रों की ओर से प्रतिनिधिमंडल में एमएलसी (शिक्षक प्रतिनिधि) जीवन कुमार, सहायक प्राध्यापक (अतिथि) डॉ. कुंदन सिंह, डॉ. उमेश कुमार, सहायक प्राध्यापक (अतिथि) डॉ. विमा रानी तथा शोध छात्र आशीष कुमार, मोनू कुमार राय उपस्थित थे। दूसरी तरफ से राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह मौजूद थे। सभी ने हस्ताक्षर कर इस सहमति पत्र को अंतिम रूप दिया है, जिसके बाद छात्रों ने अनशन तोड़ने का ऐलान किया है।



