
पार्टी अनुशासन से ऊपर कोई नहीं, JDU को कमजोर समझने की भूल न करे विपक्ष: नजरे आलम
अनंत सिंह पर कार्रवाई पार्टी का आंतरिक मामला, नीतीश कुमार के नेतृत्व और जेडीयू की मजबूती पर सवाल उठाने वालों को समय देगा जवाब
दरभंगा- 26 अक्टुबर। जनता दल (यूनाइटेड) के नेता नजरे आलम ने पार्टी विधायक अनंत सिंह के खिलाफ की गई कार्रवाई तथा उनकी पत्नी नीलम देवी से जुड़े पद और आवास संबंधी फैसलों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी भी राजनीतिक दल में संगठनात्मक अनुशासन सर्वोपरि होता है। कोई भी व्यक्ति कितना प्रभावशाली क्यों न हो, वह पार्टी की नीतियों, नेतृत्व और अनुशासन से ऊपर नहीं हो सकता।
नजरे आलम ने कहा कि यदि कोई जनप्रतिनिधि पार्टी की नीतियों के विपरीत आचरण करता है, पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होता है अथवा किसी दूसरे दल के नेता के समर्थन में खुलकर खड़ा होता है, तो पार्टी को अपने संगठनात्मक नियमों के तहत कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है। अनंत सिंह के खिलाफ छह वर्षों के निष्कासन की कार्रवाई हो या नीलम देवी से जुड़े पद और आवास संबंधी निर्णय, इन सभी मामलों को तथ्यों, नियमों और पार्टी के आधिकारिक फैसलों के आधार पर देखा जाना चाहिए। केवल राजनीतिक प्रभाव या व्यक्तिगत पहचान के आधार पर किसी को अनुशासनात्मक कार्रवाई से छूट नहीं मिल सकती।
उन्होंने कहा कि राजनीति किसी की व्यक्तिगत जागीर नहीं है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में पार्टी के भीतर भी अनुशासन, जवाबदेही और संगठनात्मक मर्यादा का महत्व है। यदि पार्टी नेतृत्व को लगता है कि किसी सदस्य का आचरण संगठन के हितों के विपरीत है, तो उसे नियमानुसार निर्णय लेने का अधिकार है। विधानसभा सदस्यता समाप्त करने जैसे संवैधानिक प्रश्न पर भी निर्णय संबंधित नियमों और सक्षम प्राधिकारी की प्रक्रिया के अनुसार ही होना चाहिए।
● नीतीश कुमार का नेतृत्व किसी के बड़बोलेपन का मोहताज नहीं:-
नजरे आलम ने कहा कि बिहार की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहचान उनके लंबे राजनीतिक अनुभव, सुशासन, विकास और प्रशासनिक निर्णयों से बनी है। कोई व्यक्ति अपने राजनीतिक प्रभाव का कितना भी दावा कर ले, उससे नीतीश कुमार के राजनीतिक योगदान और नेतृत्व की अहमियत कम नहीं हो जाती। जेडीयू की राजनीति व्यक्तिगत दबदबे पर नहीं, बल्कि संगठन, विचारधारा, नेतृत्व और जनसेवा के आधार पर आगे बढ़ी है।
उन्होंने कहा कि आज कुछ लोग अनंत सिंह के बयानों और पार्टी के भीतर की घटनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं, जबकि किसी भी राजनीतिक दल के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने से पहले तथ्यों को समझना जरूरी है। पार्टी के फैसलों पर सवाल उठाना अलग बात है, लेकिन हर कार्रवाई को जेडीयू के कमजोर होने का प्रमाण बताना राजनीतिक भ्रम फैलाने की कोशिश है।
● संजय कुमार झा को लेकर भ्रम फैलाना बंद करे विपक्ष:-
जेडीयू नेता ने पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा की भूमिका पर कहा कि उन्हें नीतीश कुमार के नेतृत्व और पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए लगातार काम करने वाले नेताओं में गिना जाता है। संजय कुमार झा ने संगठनात्मक जिम्मेदारियों को निभाते हुए पार्टी की नीतियों और नीतीश कुमार की राजनीतिक दिशा के अनुरूप काम किया है। उन्हें लेकर यह प्रचार करना कि वे पार्टी को अपने नियंत्रण में लेकर नेतृत्व को कमजोर कर रहे हैं, बिना ठोस प्रमाण के राजनीतिक आरोप लगाने जैसा है।
नजरे आलम ने कहा कि संजय कुमार झा ने कभी खुद को नीतीश कुमार से ऊपर रखने की राजनीति नहीं की। पार्टी में उनकी भूमिका संगठन को मजबूत करने, नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय स्थापित करने तथा गठबंधन की राजनीति को प्रभावी बनाने की है। जेडीयू के नेतृत्व और संगठन को लेकर भ्रम फैलाने वालों को पार्टी की वास्तविक राजनीतिक गतिविधियों और संगठनात्मक कार्यों को देखना चाहिए।
● जेडीयू खत्म होने और नीतीश कुमार की राजनीति समाप्त होने का सपना देखना छोड़ें विरोधी:-
नजरे आलम ने विपक्ष के उन नेताओं पर भी निशाना साधा जो लगातार यह दावा कर रहे हैं कि जेडीयू कमजोर हो जाएगी, नीतीश कुमार का राजनीतिक प्रभाव समाप्त हो जाएगा या पार्टी का भविष्य संकट में है। उन्होंने कहा कि जेडीयू का राजनीतिक आधार केवल किसी एक व्यक्ति या पद पर निर्भर नहीं है। पार्टी का संगठन, कार्यकर्ताओं की मेहनत, गठबंधन की भूमिका और नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत उसकी ताकत हैं।
उन्होंने कहा कि निशांत कुमार के राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं अपनी जगह हैं, लेकिन जेडीयू का भविष्य पार्टी के नेतृत्व, संगठनात्मक निर्णयों और जनता के विश्वास से तय होगा। संजय कुमार झा सहित पार्टी के वरिष्ठ नेता संगठन को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं। इसलिए पार्टी के भविष्य को लेकर अभी से नकारात्मक निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी है।
● विपक्ष अपनी राजनीति करे, जेडीयू की चिंता छोड़ दे:-
नजरे आलम ने कहा कि विपक्ष को जेडीयू के आंतरिक मामलों को लेकर अनावश्यक चिंता करने के बजाय अपनी पार्टी, अपने संगठन और अपने जनाधार पर ध्यान देना चाहिए। राजनीतिक बयानबाजी से किसी दल का भविष्य तय नहीं होता। जनता का विश्वास, संगठन की सक्रियता और जनहित के मुद्दों पर काम करना ही किसी राजनीतिक दल की वास्तविक ताकत है।
उन्होंने विश्वास जताया कि जेडीयू नीतीश कुमार के मिशन और विजन को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। पार्टी के भीतर अनुशासन बनाए रखने और संगठन को मजबूत करने की प्रक्रिया चलती रहेगी। उन्होंने कहा कि बिहार की राजनीति में जेडीयू की भूमिका को कम करके आंकना विपक्ष की भूल होगी। आने वाले समय में भी पार्टी अपनी नीतियों, संगठन और गठबंधन की ताकत के साथ राजनीतिक रूप से सक्रिय रहेगी।
अंत में नजरे आलम ने कहा, “जेडीयू में कोई भी नेता पार्टी और उसके अनुशासन से बड़ा नहीं है। नीतीश कुमार का नेतृत्व, संजय कुमार झा का संगठनात्मक अनुभव और पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं की मेहनत जेडीयू की ताकत है। विपक्ष को झूठे नैरेटिव गढ़ने के बजाय जनता के मुद्दों पर राजनीति करनी चाहिए। जेडीयू को कमजोर होने की भविष्यवाणी करने वालों को समय और जनता का फैसला जवाब देगा।”



