बिहार

BIHAR:- ठेकेदार रिशु श्री से लाभ लेने के मामले में IAS अभिलाषा शर्मा और योगेश कुमार सागर निलंबित

पटना- 30 मई। बिहार सरकार ने कथित पक्षपात और टेंडर में हेरफेर के आरोप में बिहार कैडर के दो आईएएस अधिकारी योगेश कुमार सागर और अभिलाषा शर्मा को आज ठेकेदार रिशु श्री से कथित तौर पर लाभ लेने के आरोपों मे निलंबित कर दिया है। इस मामले में ठेकेदार रिशु श्री को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।

योगेश कुमार सागर वर्तमान में समाज कल्याण विभाग के एक निदेशालय में निदेशक पद पर तैनात थे, जबकि अभिलाषा शर्मा ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत संचालित जीविका परियोजना की मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी के रूप में कार्यरत हैं।

उत्तर प्रदेश के बरेली निवासी योगेश कुमार सागर पर आरोप है कि टेंडर घोटाले के आरोपी रिशु श्री ने उन्हें और उनके परिजनों को अपने खर्च पर यूरोप की सैर कराई। जांच में सामने आया है कि इस यात्रा में योगेश सागर के साथ उनके आठ रिश्तेदार भी शामिल थे। बताया जा रहा है कि सभी ने कई यूरोपीय देशों का भ्रमण किया और यात्रा, होटल सहित अन्य खर्च रिशु श्री ने वहन किए। इस पूरी यात्रा पर करीब 21.92 लाख रुपये खर्च होने की बात सामने आई है।

आईएएस अधिकारी अभिलाषा शर्मा पर भी रिशु श्री से अनुचित लाभ लेने के आरोप लगे हैं। आरोप है कि रिशु श्री ने उनके आवास की छत पर करीब 9 लाख रुपये की लागत से बागवानी और सौंदर्यीकरण कार्य कराया था

यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब जांच एजेंसियां उन आरोपों की पड़ताल कर रही हैं कि सरकारी टेंडरों को निजी लाभ, आलीशान यात्राओं और वित्तीय प्रलोभनों के जाल के माध्यम से प्रभावित किया गया था।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच के बाद दोनों अधिकारी जांच के दायरे में आ गए हैं। बताया जा रहा है कि ईडी ने इस मामले में आगे की कार्रवाई के लिए विशेष सतर्कता इकाई (एसवीयू) को सिफारिश भेजी थी।

रिशु श्री, जिसे हाल ही में पटना में गिरफ्तार किया गया था और न्यायिक हिरासत में भेजा गया है, पर आरोप है कि उसने सरकारी विभागों के भीतर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके टेंडर से संबंधित संवेदनशील जानकारी पहले ही हासिल कर ली और अपनी पसंदीदा कंपनियों के लिए ठेके पक्के करवाए।

जांचकर्ताओं का आरोप है कि उसने वरिष्ठ अधिकारियों और नौकरशाहों के साथ करीबी संबंध बनाए, जिससे वह कई विभागों में खरीद प्रक्रियाओं पर अपना प्रभाव डाल सका। अबतक ईडी की जांच के निष्कर्षों से पता चलता है कि सरकारी कर्मचारियों को दिए गए लाभ एक बड़े षड्यंत्र का हिस्सा थे, जिसका उद्देश्य सरकारी ठेकों में हेरफेर करना और व्यावसायिक लाभ प्राप्त करना था।

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