
MADHUBANI: तालाबों की रक्षा करना हरेक लोगों का नैतिक कर्तव्य: गुणानंद यादव
मधुबनी- 05 जुलाई। मेयर प्रत्याशी गुणानंद यादव ने कहा कि रहिका अंचल कार्यालय द्वारा नगर निगम क्षेत्र के सभी सरकारी तालाबों का अतिक्रमण मुक्त कराया जाने में आम लोगों को सहयोग करना चाहिए। तालाबों से अतिक्रमण खाली कराकर इसे जल जीवन हरियाली योजना से जोड़कर विकसित किया जाना चाहिए, ताकि वर्षा जल का संरक्षण हो सके। जल की शुद्धता बनी रहे। उन्होंने कहा कि निगम क्षेत्र के कई तालाबों को विकसित कर पर्यटन लायक बनाया जा सकता है। इसके लिए नगर निगम प्रशासन को आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि संस्कृति, समृद्धि और पर्यावरण संरक्षण के प्रतीक तालाबों के अस्तित्व पर की रक्षा के गंभीरता से पहल करना होगा। तालाब हमारे जीवन का अभिन्न अंग है। इसकी रक्षा जरूरी है। जल के बगैर मानव जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है। तालाबों की रक्षा करना हरेक लोगों का नैतिक कर्तव्य होता है। तालाबों के जीर्णोद्धार के दिशा में लोगों को आगे आना चाहिए। तालाबों के अतिक्रमण से इसके अस्तित्व पर संकट का बादल मंडरा रहा है। साल दर साल उपेक्षा से तालाबों के स्वरूप को बदलता चला गया। अधिकांश तालाब व उसकी जमीन अतिक्रमणकारियों के कब्जे में चला गया है। इस दिशा में संबंधित विभाग भी उदासीन बना है। इसके संरक्षण के दिशा में संबंधित विभाग की कुंभकर्णी निद्रा टूटती ही नहीं है। जंगलझाड़ में तब्दील अनेकों तालाब सूखने के करीब पहुंच गया। तालाब में जंगल-झाड़ होने से बरसात के दिनों में थोड़ी-बहुत तालाब की प्यास तो बूझती है लेकिन तालाब में वर्षा जल का संरक्षण नही हो रहा है। अतिक्रमणकारियों ने तालाबों के अस्तित्व पर सवाल खड़ा कर दिया है। एक दशक पूर्व तक तालाब की काफी अहमियत थी। जंगल-झाड़ से भर चुके तालाब के चहुंओर झुग्गी-झोपड़ी नजर आ रहे हैं। तालाबों में पानी नही रहने से गर्मी के दिनों में बच्चे इसे खेल मैदान के रुप में उपयोग करते हैं। अतिक्रमण की होड़ में निगम क्षेत्र की तालाबों का दायरा सिमटता जा रहा हैं। उन्होंने कहा कि तालाबों व उसके भिडे का अतिक्रमण का जंजाल भी फैलता चला गया। तालाबों के जमीन को भराकर घर बनते जा रहे हैं। यह सिलसिला जारी रहा तो आने वाले दशकों में तालाबों का अस्तित्व समाप्त होने के कगार पर पहुंच जाएगा।



