
बिहार में राजस्व कर्मचारियों और अमीनों की हड़ताल पर सरकार सख्त, 24 घंटे में काम पर लौटने का अल्टीमेटम
पटना, 03 नवंबर। बिहार में राजस्व कर्मचारियों और अमीनों की हड़ताल से अंचल कार्यालयों में जमीन से जुड़े काम पूरी तरह ठप पड़ गए हैं। दाखिल-खारिज, परिमार्जन प्लस, जमाबंदी, ई-मापी, जाति-आय-निवास सहित करीब 1 लाख से ज्यादा आवेदन लंबित हैं। आम लोगों की बढ़ती परेशानी को देखते हुए राज्य सरकार ने अब सख्त रुख अपना लिया है।
राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने हड़ताली कर्मचारियों को 24 घंटे के भीतर काम पर लौटने का अल्टीमेटम दिया है।
विभाग ने क्या आदेश जारी किया?
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर सचिव अमित कुमार पांडेय द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि इस विज्ञप्ति के जारी होने के 24 घंटे के भीतर अनिवार्य रूप से अपने संबंधित अंचल कार्यालय में योगदान* समर्पित करें। 24 घंटे के भीतर काम पर नहीं लौटने वाले अमीनों का यह कृत्य बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली का उल्लंघन और अनाधिकृत अनुपस्थिति माना जाएगा।
काम पर नहीं लौटे तो क्या होगा?
तत्काल सस्पेंशन: बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के तहत तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया जाएगा। नो वर्क, नो पे: हड़ताल, सामूहिक अवकाश की अवधि का कोई वेतन देय नहीं होगा। ब्रेक इन सर्विस: इस अवधि को सेवा में व्यवधान (Break in Service) माना जाएगा।
हड़ताल क्यों हो रही है?
बिहार राजस्व अमीन संघ ने अपनी मांगों को लेकर 6 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन सामूहिक अवकाश शुरू किया था, वहीं राजस्व कर्मचारियों का आंदोलन अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में तेज हुआ। कर्मचारियों की मुख्य मांगें वेतनमान, पदस्थापन, पदोन्नति और सेवा शर्तों से जुड़ी हैं।
सरकार ने की थी दो बार वार्ता—
विभाग का कहना है कि मांगों पर सकारात्मक पहल के लिए 14 अक्टूबर 2026 को मंत्री दिलीप जायसवाल की अध्यक्षता में अमीन संघ के साथ बैठक हुई थी, और 26 अक्टूबर को फिर राजस्व कर्मचारी संघों के साथ उच्चस्तरीय बैठक हुई थी। लेकिन कर्मचारी लिखित आश्वासन पर अड़े रहे और हड़ताल जारी रखी।
अब सरकार ने साफ कर दिया है कि काम पर लौटो, नहीं तो कार्रवाई के लिए तैयार रहो।



