
MADHUBANI: शहर के 13 नंबर रेलवे गुमती के निकट सड़क पर सरकारी पुल और पुल के नीचे भू-माफियाओं का घर-दुकान और बिल्डिंग
मधुबनी- 11 जुलाई। मधुबनी शहर के 13 नंबर रेलवे गुमती के निकट सरकारी पुल की जमीन का अतिक्रमण रुकने का नाम नहीं ले रहा है। करीब आधा दर्जन सरकारी पुल की जमीन अतिक्रमित होने से बारिश का पानी का बहाव पिछले कई सालों से बाधित हो गया है। स्थानीय लोगों ने बताया कि एक दशक पूर्व तक बारिश का पानी पुल के नीचे होकर गुजरता था। लेकिन पुल का निर्माण के बाद राजनगर अंचल के हाकिम और राजस्व कर्मचारी की मिली-भगत से पुल की सरकारी जमीन पर भू-माफियाओं को अतिक्रमण की खुली छूट मिल गई।
लोगों का आरोप है कि एक राजस्व कर्मचारी और अंचल अधिकारी की उदासीनता से पुल के आसपास सरकारी जमीन का फर्जी कागजात के आधार पर अनेकों लोग अपना स्वामित्व का दावा करते है। बता दें कि साल 2014 के राजनगर अमीन के मापी प्रतिवेदन है। अमीन द्वारा राजनगर अंचल अधिकारी को समर्पित प्रतिवेदन में रकवा 0-9-8 धूर मे 2 कट्ठा 19 धूर स्थानीय लोगों द्वारा अतिक्रमण पाया गया था।सीएस खतियान के अनुसार खेसरा 2094 से सटे पूरब खेसरा 2475 बिहार सरकार की भूमि पर गड्ढा 7 कट्ठा 2 धूर खेखरा 2473 में पूरब की ओर मिट्टी भराई गई है। जबकि इस जमीन को अतिक्रमणकारी फर्जी कागजात के आधार पर अपना बता रहे है। जिससे सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने में पेज फंस गया है। भू-माफियाओं को बढ़ावा देने वाले एक राजस्व कर्मी भू-माफियाओं को सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की खुली छूट दे दी गई। जानकारों के मुताबिक फर्जी कागजात के आधार पर भू-माफियाओं ने सरकारी जमीन की खरीद-फरोख्त शुरु कर दी।
स्थानीय लोगों ने बताया कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। बल्कि शिकायत करने वाले लोगों को ही डाट-फटकार की जाती है। लोगों का कहना है कि इस मामले और अतिक्रमित भूमि की जांच राजनगर अंचल अधिकारी की बजाय जिला के किसी वरीय अधिकारी से कराया जाना चाहिए, ताकि निष्पक्ष रूप से जांच कार्य हो सके और सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त हो सके।



