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पहले पंचायत में साथ बैठकर समस्या का समाधान होता था, मीडिएशन उसका आधुनिक नाम: CJI

जयपुर- 31 जुलाई। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि पहले पंचायत में साथ बैठकर समस्या का समाधान होता था, आज उसका आधुनिक नाम मीडिएशन हो गया है। मिडिएशन बताता है कि विवाद सुझालने के दौरान एक आवाज दूसरी आवाज को दबा नहीं पाए। उन्होंने कहा कि विवाद चाहे कितना भी बडा और छोटा हो और चाहे दो देशों के बीच युद्ध विराम का ही मामला क्यों ना हो, सभी विवादों को सुलझाने का मूल तरीका लगभग एक जैसा ही है। सीजेआई शुक्रवार को जयपुर में आयोजित कॉमनवेल्थ पीस मीडिएशन एंड रूल ऑफ लॉ विषय पर आयोजित कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि विवाद का निस्तारण करने के लिए किसी को बोलने से ज्यादा सुनना पड़ता है। दोनों पक्षों की बात को सही तरीके से समझकर एक-दूसरे तक पहुंचाना पड़ता है। साथ ही यह विश्वास रखना पड़ता है कि दोनों पक्ष एक-दूसरे को बेहतर तरीके से समझा सकते हैं और साथ मिलकर बेहतर जीवन जीने का रास्ता निकाल सकते हैं। यह कोई सामान्य योग्यता नहीं है। यह कानूनी पेशे में यह सबसे कठिन योग्यता है। इसे सीखने के लिए ट्रेनिंग और अनुभव से लगातार सीखने की जरूरत होती है।

सीजेआई ने कहा कि जयपुर को सामाजिक सौहार्द के सिद्धांत पर बसाया गया है। शहर का निर्माण इस तरह हुआ है कि एक हिस्सा, दूसरे पर हावी नहीं होता। इससे लगता है कि इस कांफ्रेस की इससे बेहतर जगह दूसरी नहीं हो सकती थी।

राजस्थान हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एसपी शर्मा ने कहा सीजेआई का मानना है कि मीडिएशन को सामाजिक सौहार्द और संस्था में विश्वास करने के टूल की तरह काम में लेना चाहिए। इस तीन दिन की कॉन्फ्रेंस में हम इसी विषय पर चर्चा करेंगे। आधुनिक लीगल सिस्टम को न केवल न्याय देने वाला होना चाहिए, बल्कि समाज के अंतिम छोर की भागीदारी करने वाला होना चाहिए। राजस्थान मध्यस्थता के माध्यम से केसों का निपटारा करने में भारत में दूसरे स्थान पर है।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हम हमेशा संघर्ष से पहले समझौते का प्रयास करते हैं। इसके दो उदाहरण हमारे इतिहास में हैं। राम युद्ध जीत सकते थे। वे भगवान हैं, उनके पास सेना थी, लेकिन उन्होंने पहले समझौते के लिए अंगद को भेजा। वहीं श्रीकृष्ण ने भी महाभारत के युद्ध से पहले दुर्योधन के पास समझौते के लिए दूत भेजा। ये उदाहरण यह भी बताते हैं कि यदि कोई मानना न चाहे तो भगवान भी समझौते के जरिए उन्हें संघर्ष से नहीं बचा सकते हैं।

कांन्फ्रेस को संबोधित करते हुए केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने कहा कि हमारे यहां मध्यस्थता का सबसे बड़ा उदाहरण पंच परमेश्वर परंपरा रही है। इसी परंपरा से भारत अंतराष्ट्रीय मध्यस्थता के स्तर पर पहुंचा है। आज कई कानूनी चुनौतियां बढ़ी हैं। सीमा पार व्यापारिक विवादों की प्रकृति तेजी से बदल रही है। ऐसे में जटिल विवादों के लिए आधुनिक और प्रभावी समाधान की जरूरत है।

कार्यक्रम में उपस्थित सीएम भजनलाल शर्मा ने कहा कि आज दुनिया को शांति और मध्यस्थता की जरूरत है। कोर्ट में लंबित मुकदमों से व्यक्ति की संपत्ति, समय और पैसा सब छीन जाता है। सालों साल अदालतों के चक्कर काटने पर भी जो विवाद नहीं सुलझते हैं, मध्यस्थता से ऐसे विवादों का समाधान निकलता है। वह समाधान स्थायी और लंबे समय के लिए होता है। उन्होंने कहा कि सौहार्द बनाए रखने का काम हमारे यहां पंचायतें करती आई हैं। वो केवल विवाद ही नहीं, बल्कि दोनों पक्षों के बीच के कड़वाहट को भी खत्म करते थे।

कांन्फ्रेस को संबोधित करते हुए जाम्बिया सुप्रीम कोर्ट की जज आभा नायर पटेल ने कहा कि मैं यहां कांटों के बीच गुलाब हूं या गुलाब के बीच कांटा हूं, मुझे नहीं पता। मुझे गर्व है कि मैं यहां कांटो के बीच गुलाब हूं या गुलाब के बीच काटा हूं, मुझे नहीं पता। मुझे गर्व है कि मैं जांबिया सुप्रीम कोर्ट में पहुंचने वाली भारतीय मूल की पहली महिला हूं। मिडिएशन से मुकदमे का अंत होने के साथ-साथ पक्षकारों के बीच गरिमा और विश्वास भी बना रहता है। हम कॉन्फ्रेंस में आकर यहां के न्याय व्यवस्था की खूबियों को सीखेंगे।

इस सम्मेलन में कॉमनवेल्थ के 52 देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। सम्मेलन का आयोजन राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (रालसा) की ओर से किया जा रहा है और इसका उद्देश्य न्यायिक व्यवस्था में मध्यस्थता को बढ़ावा देना है।

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