
MADHUBANI: नगर निगम का गजब कारनामा! आदेश में ‘आदि’ शब्द में छिपा दिया जलमीनार?, मामले को दबाने की कोशिश
मधुबनी, 10 सितंबर। नगर निगम के वार्ड नं. 03 के एक जलमीनार को लेकर नगर निगम के जवाब ने खुद निगम की कार्यशैली पर ही बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
बता दें कि वार्ड 03 में नल-जल योजना के तहत करीब 8 साल पूर्व बने जलमीनार से वार्ड के लोगों को पानी नहीं मिलने की शिकायत प्रेम कुमार यादव ने सहयोग पोर्टल (शिकायत सं. 888774458) पर की थी। जांच में सामने आया कि पंचायती राज विभाग द्वारा स्थापित नल-जल योजना का जलमीनार, बोरिंग और मोटर उमेश कुमार यादव की निजी जमीन पर लगा हुआ है।
*नगर निगम के कनीय अभियंता ने की जांच*
इसी पर नगर निगम के कनीय अभियंता ने उमेश कुमार यादव को सूचना सं. 100, दिनांक 02/09/26 से आदेश जारी कर दिया कि 7 दिन के अंदर बोरिंग, पाइपलाइन, मोटर, स्टार्टर वगैरह नगर निगम को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें और पानी के दुरुपयोग पर रोक लगाएं।
*आदेश से खड़े हो रहे 3 बड़े सवाल*
अब इसी आदेश पर 3 बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। पहला – विभाग ने बिना जमीन अधिग्रहण, बिना लीज और बिना दान-पत्र के किसी की निजी जमीन पर लाखों की योजना कैसे लगा दी? इसका NOC कहां है? दूसरा – आदेश में जलमीनार शब्द गायब कर ‘आदि’ में जलमीनार को छिपा दिया गया। नोटिस में बोरिंग, पाइप, मोटर, स्टार्टर का जिक्र है, लेकिन 20 फीट से अधिक ऊंचे जलमीनार का कहीं नाम नहीं। क्या पूरा टावर ‘आदि’ शब्द में छिपा दिया गया? अगर नहीं, तो क्या टावर निजी जमीन पर ही रहेगा और सिर्फ मोटर उखाड़ी जाएगी? तीसरा – जमीन में 200 फीट धंसा बोरिंग और कंक्रीट फाउंडेशन में गड़ा जलमीनार क्या उमेश कुमार यादव खुद जेसीबी और क्रेन लाकर उखाड़ेगा? और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा तो जिम्मेदार कौन होगा?
*योजना वाली जमीन के NOC की जांच होनी चाहिए*
वार्ड 03 के लोगों का कहना है कि निगम को उमेश यादव को इस तरह का आदेश देने की बजाय योजना वाली जमीन के NOC की जांच की जानी चाहिए। NOC के आधार पर विधि-सम्मत समुचित कार्रवाई की जानी चाहिए थी। निजी जमीन पर योजना क्यों लगाई गई, इसकी जांच होनी चाहिए। वार्ड के लोगों का आरोप है कि यह आदेश मामले को सुलझाने के बजाय मामले को उलझाकर दबाने की कोशिश है।
