
07 नवंबर को छोटी दिवाली: नरकासुर वध और यम पूजा का पर्व है नरक चतुर्दशी: पं. ऋषिनाथ झा
मधुबनी- 01 नवंबर। कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाने वाला नरक चतुर्दशी पर्व इस वर्ष 7 नवंबर को मनाया जाएगा। इसे छोटी दीपावली, रूप चौदस और यम चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। इस पर्व के शास्त्रीय महत्व पर जानकारी देते हुए प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. ऋषिनाथ झा ने बताया कि शास्त्रों में नरक चतुर्दशी के तीन प्रमुख प्रसंग वर्णित हैं। उन्होंने बताया कि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अत्याचारी नरकासुर का वध कर 16,100 कन्याओं को मुक्त कराया था। इस कारण इसे नरक से मुक्ति का पर्व माना जाता है।
इसे यम चतुर्दशी भी कहते हैं। इस दिन यमराज के निमित्त दीपदान करने से अकाल मृत्यु और नरक के भय से मुक्ति मिलती है। पं. झा ने कहा कि इस दिन यम के नाम से दक्षिण दिशा में चौमुखा दीपक जलाने की परंपरा है, जिसे यम दीपम कहा जाता है।
पं. झा ने बताया कि ब्रह्म पुराण और धर्मसिंधु में उल्लेख है कि चतुर्दशी के दिन सूर्योदय से पहले तिल के तेल से शरीर की मालिश कर, अपामार्ग (चिचड़ी) के पत्तों को सिर पर रखकर स्नान करने से नरक की यातना समाप्त होती है और रूप-सौंदर्य की प्राप्ति होती है। इसी कारण इसे रूप चौदस भी कहते हैं।
पं. झा के अनुसार सुबह ब्रह्म मुहूर्त में तेल-उबटन लगाकर स्नान करें। शाम को घर के मुख्य द्वार और रसोई में दीपक जलाएं। यम के नाम का दीपक घर से बाहर दक्षिण दिशा में रखें। हनुमान जी की पूजा और दीपदान करने से कष्टों से मुक्ति मिलती है।
उन्होंने कहा कि नरक चतुर्दशी आत्मा की शुद्धि और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, जो अगले दिन दीपावली के आगमन की सूचना देता है।



