
धनतेरस पर दक्षिण दिशा में जरूर जलाएं यम दीपम, टलता है अकाल मृत्यु का भय : पं. ऋषिनाथ झा
मधुबनी- 27 अक्टूबर। धनतेरस के दिन यम के नाम का दीया जलाने की परंपरा का विशेष महत्व है। प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. ऋषिनाथ झा ने बताया कि शास्त्रों में इसे यम दीपम कहा गया है।
पं. झा ने बताया कि स्कंद पुराण और धर्मसिंधु के अनुसार धनतेरस की संध्या पर घर के बाहर दक्षिण दिशा में तेल का दीया जलाने से अकाल मृत्यु का भय टलता है। उन्होंने कहा कि दक्षिण दिशा यम की दिशा मानी गई है। इस दिन प्रदोष काल में दक्षिणाभिमुख होकर चतुर्मुखी तेल का दीया जलाने और यमराज से परिवार की रक्षा की प्रार्थना करने से पूरे परिवार में आरोग्य बना रहता है और सभी दोष दूर होते हैं।
पं. झा के अनुसार दीया जलाते समय “मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन श्यामया सह। त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतामिति” मंत्र का उच्चारण करना चाहिए। उन्होंने बताया कि यह दीया घर के अंदर नहीं, बल्कि घर की दहलीज के बाहर, कूड़ा-कचरा वाले स्थान या श्मशान की ओर मुख करके जलाना सबसे फलदायी माना गया है। इस साल 6 नवंबर को धनतेरस मनाई जाएगी।



