
मधुबनी के स्कूलों में बच्चों से धुलवाई जा रही थाली, MDM नियमों की खुलेआम अनदेखी: विपिन कुमार झा
मधुबनी- 20 सितंबर। जिले के अधिकांश सरकारी प्राथमिक व मध्य विद्यालयों में मिड डे मिल खाने के बाद बच्चों को खुद थाली धोते देखा जा रहा है, जबकि शिक्षा विभाग और मध्याह्न भोजन योजना की गाइडलाइन में इस पर स्पष्ट रोक है। नियम के अनुसार थाली धोने के लिए रसोइया, सहायिका की नियुक्ति की गई है। इसके लिए अतिरिक्त मानदेय भी दिया जाता है। बच्चों से किसी भी तरह का शारीरिक श्रम कराना बाल श्रम (निषेध) अधिनियम का उल्लंघन है। कई बच्चों के अभिभावकों का कहना है कि शिक्षक समय बचाने के लिए बच्चों से ही थाली धुलवाते हैं। इससे पढ़ाई का समय बर्बाद होता है। छोटे बच्चों में भेदभाव की भावना भी आती है। अभिभावकों ने जिला शिक्षा पदाधिकारी से विद्यालयों में मिड डे मिल के समय औचक निरीक्षण करने की मांग की है।
इधर, जिले के सरकारी विद्यालयों में मध्यान्ह भोजन (MDM) के बाद बच्चों से जूठी थाली धुलवाने की प्रथा पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस पार्टी के पूर्व जिला महासचिव विपिन कुमार झा ने इस पर कड़ा विरोध जताते हुए जिलाधिकारी और शिक्षा विभाग से तत्काल रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि विद्यालय ज्ञान का मंदिर है, मजदूरी का जगह नहीं। जब रसोइया को सरकार मानदेय दे रही है, तो फिर मासूम बच्चों से जूठे बर्तन क्यों धुलवाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत किसी भी बच्चे से गरिमापूर्ण कार्य से अलग कोई भी श्रमिक जैसा काम नहीं कराया जा सकता। कई जगहों पर छोटे बच्चे स्कूल के बाद चापाकल पर थाली धोते देखे जाते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि इस पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे शिक्षा कार्यालय के समक्ष धरना देंगे। बाल संरक्षण आयोग को शिकायत पत्र भेजेंगे।



