
बिहार
RSS के तत्वावधान में भारतीय शिक्षा,संस्कृति व संस्कार मंथन का आयोजन, शिक्षा और समाजिक बदलाव पर हुई विशेष चर्चा
मधुबनी- 20 सितंबर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, जिला मधुबनी के तत्वावधान में रविवार को रांटी चौक स्थित चन्द्रा कॉम्प्लेक्स में शिक्षाविद संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए सैकड़ों शिक्षाविदों, शिक्षक-शिक्षिकाओं, प्राचार्यों एवं संघ के स्वयंसेवकों ने भाग लिया। कार्यक्रम में भारतीय दृष्टिकोण पर आधारित शिक्षा,संस्कृति,संस्कार एवं राष्ट्रीय चेतना जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।
संगोष्ठी के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने शिक्षा और संस्कृति के माध्यम से विद्यार्थियों में सामाजिक जिम्मेदारी एवं राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल किताबी ज्ञान प्राप्त करने तक सीमित नहीं है। शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति के भीतर संस्कार, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र के प्रति चेतना का निर्माण होता है।
उन्होंने शिक्षक की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा करने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व एवं चरित्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारतीय संस्कृति को राष्ट्र की आत्मा बताते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति,परंपरा और जीवन-मूल्यों को समझने का अवसर मिलना चाहिए।
‘पंच परिवर्तन’ पर विशेष चर्चा संगोष्ठी में ‘पंच परिवर्तन’ की अवधारणा को प्रमुखता से रखा गया। इसके तहत कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी आचरण, सामाजिक समरसता एवं नागरिक कर्तव्य बोध जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
सामाजिक समरसता के तहत समाज के विभिन्न वर्गों के बीच भेदभाव को समाप्त कर एकात्मता की भावना विकसित करने पर जोर दिया गया। पर्यावरण संरक्षण के अंतर्गत जल संरक्षण, प्लास्टिक का कम उपयोग और वृक्षारोपण को बढ़ावा देने की बात कही गई।
कुटुंब प्रबोधन के माध्यम से पारिवारिक संस्कारों एवं नैतिक मूल्यों को मजबूत करने पर चर्चा हुई। वहीं स्व आधारित जीवन के तहत अपनी भाषा, वेशभूषा, संस्कृति और स्वदेशी वस्तुओं के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने की बात कही गई। नागरिक कर्तव्य बोध के अंतर्गत कानून, नियमों एवं नागरिक दायित्वों के पालन को आवश्यक बताया गया।
वक्ता ने कहा कि एक शिक्षक के रूप में यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि पंच परिवर्तन का संदेश केवल व्याख्यानों तक सीमित न रहे, बल्कि शिक्षकों के आचरण और कक्षाओं के माध्यम से विद्यार्थियों के जीवन का हिस्सा बने।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं आचार्यों द्वारा वैदिक स्वस्तिवाचन के साथ हुई। कार्यक्रम के संचालन एवं आयोजन में जिला शिक्षक कार्य प्रमुख मनोज कुमार झा, जिला संघचालक अरविंद कुमार सिन्हा, जिला कार्यवाह डाॅ. केशव चंद्र झा, रौशन महासेठ सहित अन्य कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
संगोष्ठी में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए शिक्षाविदों एवं शिक्षकों ने शिक्षा को ज्ञान के साथ संस्कार, संस्कृति, सामाजिक दायित्व एवं राष्ट्रीय चेतना से जोड़ने की आवश्यकता पर अपने विचार रखे।



