
MADHUBANI:- जीविका ने बदली ग्रामीण महिलाओं की तकदीर, मात्र 10 रुपये की बचत से बन रही लखपति: जीविका मित्र वीणा कुमारी
मधुबनी- 20 सितंबर। बिहार की ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में जीविका की भूमिका सबसे अहम हो गई है। जीविका मित्र वीणा कुमारी ने बताया कि आज गांव की महिलाएं सिर्फ गृहिणी नहीं, बल्कि उद्यमी बन रही हैं। जीविका मित्र का मुख्य कार्य गांव की 10-15 महिलाओं को जोड़कर स्वयं सहायता समूह (SHG) बनाना है। हफ्ते में एक दिन बैठक कर मात्र 10 रुपये की बचत से शुरू करके महिलाओं को बैंक से जोड़ना, हिसाब-किताब रखना और उन्हें 30 हजार से लेकर 1.5 से 2 लाख रुपये तक का कम ब्याज पर ऋण दिलवाना हमारा काम है।
उन्होंने कहा कि जीविका और मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत महिलाओं को सिलाई, मुर्गी पालन, बकरी पालन, सुधा डेयरी जैसी गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई नई पहल शुरू की गई हैं। जीविका सुधा बिक्री केंद्रों का विस्तार, महिला समूहों के उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के लिए। कौशल विकास के लिए कार्यक्रम के अलावा बालिका PHD फेलोशिप योजना में उच्च शिक्षा के लिए 1 हजार छात्राओं को हर महीने 10 हजार रुपये का लाभ देने की सरकार द्वारा पहल की गई है। बिहार सरकार अब तक 12 लाख लोगों को नौकरी दे चुकी है, अब एक करोड़ लोगों को रोजगार देना लक्ष्य है, जिसमें महिलाओं की भागीदारी सबसे ज्यादा होगी। बिहार पहला राज्य है जो ‘पुलिस दीदी’ पहल शुरू कर स्कूल, कॉलेजों के पास महिला पुलिस तैनात कर रहा है। जीविका समूह को लोन दिलवाना ही नहीं, बल्कि उस पैसे से रोजगार शुरू करवाना और जब तक वह चल न जाए, तब तक हैंड-होल्डिंग सपोर्ट देना भी हमारी जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत जीविका मित्रों की भूमिका और बढ़ गई है। वीणा कुमारी ने बताया कि सरकार द्वारा महिलाओं के खाते में भेजे गए 10 हजार रुपये का उपयोग के लिए घर-घर जाकर सर्वे कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जीविका सिर्फ आर्थिक सशक्तिकरण नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता भी है। स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता, बाल विवाह और दहेज के खिलाफ भी महिलाओं को जागरूक कर रही हैं। जीविका से जुड़कर महिलाएं बैंक जाने से नहीं डरतीं, खुद हस्ताक्षर करती हैं। अपने परिवार के फैसले खुद लेती हैं।



