
बिहार के सभी सदर अस्पतालों में 76 सर्जरी अनिवार्य, स्वास्थ्य विभाग का बड़ा आदेश
पटना- 19 सितंबर। बिहार के सरकारी अस्पतालों में इलाज को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा आदेश जारी किया है। निदेशालय, स्वास्थ्य सेवाएं, बिहार, पटना के निदेशक प्रमुख (प्रशासन) डॉ. प्रणय राज शरण सिन्हा ने 14 सितंबर 2026 को सभी असैनिक शल्य चिकित्सक-सह-मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी को पत्र भेजकर निर्देश दिया है कि राज्य के सभी जिला सदर अस्पतालों में शल्य चिकित्सा की बुनियादी सुविधाएं हर हाल में सुनिश्चित की जाएं।
पत्र में कहा गया है कि सरकार ने जिला अस्पताल, अनुमंडलीय अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में आधारभूत संरचना और मानव बल लगातार बढ़ाया है। अब सदर अस्पतालों के सुदृढ़ीकरण के तहत 24X7 इमरजेंसी, SNCU, ICU और ट्रायज की सुविधा बेहतर की जा रही है।
छह विभागों में 76 सर्जरी चिह्नित—
विभाग ने 6 विभागों के लिए 76 बुनियादी शल्य क्रियाओं को चिह्नित किया है, जिसे चरणबद्ध तरीके से सभी सदर अस्पतालों में शुरू करना है। इससे रेफर मरीजों की संख्या घटेगी और आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों को जिले में ही इलाज मिल सकेगा।
कौन-कौन सी सर्जरी होगी—
1.जनरल सर्जरी -सिस्ट, हाइड्रोसील, हर्निया, अपेंडिक्स, फिस्टुला, फिशर, खतना, ब्रेस्ट में गांठ, आंत में रुकावट/छेद, पित्ताशय की पथरी, टंग टाई, नसबंदी, स्किन ग्राफ्टिंग, घाव की सफाई।
2.हड्डी रोग (ऑर्थो) टिबिया-फीमर में रॉड, ह्यूमरस प्लेटिंग, टेंस नेल, कूल्हे की हड्डी का रिप्लेसमेंट, बाहरी फिक्सेटर, प्लास्टर, हड्डी में इंफेक्शन, हाथ की चोट, टेढ़े पैर (CTEV), अंग विच्छेदन।
3.प्रसूति एवं स्त्री रोग- सामान्य और जटिल सिजेरियन, बच्चेदानी का ऑपरेशन, एक्टोपिक प्रेगनेंसी, MTP, महिला नसबंदी, बच्चेदानी में रसौली का ऑपरेशन।
4.नेत्र रोग-मोतियाबिंद (SICS और फेको), काला मोतिया, नासूर, नाखूना, आंख में मांस की गांठ,पलक की सर्जरी।
5.नाक-कान-गला (ENT) – कान की लोब, कान-नाक में गांठ, कान बहना (CSOM), कान के पर्दे का ऑपरेशन, साइनस, गले के ऑपरेशन, टॉन्सिल, श्वास नली में छेद।
6.दंत रोग – दांत निकालना, सफाई, भरना, रूट कैनाल, बच्चों के दांत का इलाज, जबड़े की वायरिंग, ओरल कैंसर स्क्रीनिंग।
अस्पताल के बोर्ड पर लगेगी लिस्ट,आशा दीदी गांव-गांव करेंगी प्रचार—
विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह सूची मार्गदर्शन के लिए है, जनहित में इससे अतिरिक्त उच्चस्तरीय सुविधा भी दी जा सकती है। सभी सिविल सर्जन को निर्देश है कि इस सूची को अस्पताल के बाहर बड़े बोर्ड पर प्रदर्शित करें और आशा, ममता कार्यकर्ताओं के माध्यम से गांव-गांव में प्रचार कराएं। इसकी समीक्षा राज्य स्वास्थ्य समिति करेगी और पाक्षिक प्रगति रिपोर्ट विभाग को भेजी जाएगी।



