
‘मैं मधुबनी शहर का गंगासागर तालाब हूं, मुझे लज्जा आती है!
मधुबनी – 13 अगस्त। मैं शहर का गंगासागर तालाब हूं। मैं सालों से उपेक्षा का शिकार हूं। मेरे एक घाट के सामने देह व्यापार जैसे घिनौना कार्य से मुझे लज्जा आती है। इन्हें रोकने वाला कोई नजर नहीं आता है। मेरे मालिक, केयरटेकर और स्थानीय बुद्धिजीवियों के उपेक्षा का शिकार हूं। कईयों ने मेरे भिंडा को आमदनी का जरिया बना रखा है, जिससे मैं काफी निराश हूं।

मैं बताता चाहता हूं कि सूर्योपासना के महापर्व छठ पूजा के लिए मेरे चहुंओर घाटों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं। मेरी गिनती शहर के सबसे बड़ी व पवित्र तालाब के रूप में होती है। मेरे एक घाट के सामने मां काली मंदिर आने वाले बड़ी संख्या श्रद्धालु मेरे जल से स्वच्छ होकर ही मंदिर जाते हैं। मेरे एक भिंडा पर अनेकों दुकानों ने अतिक्रमित कर रखा है। दुकानों से छठ पूजा में श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
इधर, छठ पूजा में करीब दो माह बचे हैं लेकिन मेरी घाटों से दुकानों को नहीं हटाई जा रही है। जरूरत है मेरे घाटों की स्वच्छता बहाल रखने की। मेरे घाटों की साफ-सफाई रखने वाला नजर नहीं आ रहा है। मुझे याद है कि करीब तीन दशक पूर्व मेरी सौंदर्यीकरण के लिए तीन दशक पूर्व तत्कालीन जिलाधिकारी ने कारगर प्रयास किया गया था। कई दमकल लगाकर दूषित पानी को निकाला था। शहर के लोगों ने अपने श्रमदान से मुझे संवारा था। तब, मुझे काफी खुशी हुई थी। मेरे चारों ओर घाट का निर्माण कराया गया था। जो, कई जगहों पर आज भी अधूरा है। घाट किनारे लोगों के लिए बैठने के लिए कई बैंच बनाए गए थे। अब वह ध्वस्त नजर आ रहे हैं। मुझे आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि मेरे मालिक, केयरटेकर और स्थानीय बुद्धिजीवियों मेरे घाटों और मेरे परिसर की गरिमा की रक्षा के लिए आगे आएंगे। जिससे मुझे खुशी होगी।



