
MADHUBANI:- रंग और कूची के सहारे मिथिला पेंटिंग में आत्मनिर्भर हो रही छात्राएं और महिलाएं : MLC घनश्याम ठाकुर
मधुबनी- 19 जुलाई। मिथिला कृति कला, बेनीपट्टी द्वारा प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल प्रतिभागी कलाकारों के बीच विधान पार्षद घनश्याम ठाकुर द्वारा प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधान पार्षद ने कहा कि प्रशिक्षित कलाकार कला के माध्यम से मिथिला की सांस्कृतिक पहचान को देश-विदेश में नई ऊंचाईयों तक पहुंचाएंगे। प्रशिक्षकों एवं कलाकारों की प्रतिभा, समर्पण और कला के प्रति जुनून को नजदीक से देखने का अवसर मिला है।
विधान पार्षद ने कहा कि रंग और कूची के सहारे बेनीपट्टी की छात्राएं और महिलाएं मिथिला पेंटिंग में हुनरमंद हो रही है। कला के क्षेत्र में अपनी पहचान साबित करते हुए शिक्षा के लिए धन भी जुटा रही हैं। शिक्षित होने के साथ ही आत्मनिर्भर बन रही हैं। अपनी कला के माध्यम से संस्कृति का प्रचार भी कर रही हैं। विधान पार्षद ने कहा कि मिथिला पेंटिंग की पारंपरिक कला बालिका शिक्षा के क्षेत्र में एक नई उम्मीद की तरह खड़ी हुई है। मिथिला पेंटिंग का प्रशिक्षण लेकर खुद को आत्मनिर्भर बनाया है। कई कलाकार जिले के विभिन्न भागों में प्रशिक्षण केंद्र चला रहे हैं। इन केंद्रों से पारंपरिक कला का प्रशिक्षण हासिल कर रही हैं। कोरोना काल में मिथिला पेंटिंग ने इससे जुड़े कलाकारों के लिए विपत्ति में अवसर प्रदान किया है। पीएम नरेन्द्र मोदी भी इसकी सराहना कर चुके हैं।
साड़ी, कुर्ता-कुर्ती, शॉल, पाग, दुपट्टा, रुमाल, चादर, बेडशीट आदि पर व्यापक स्तर पर मिथिला पेंटिंग हो रही है। इसके अलावा अब घरेलु उत्पादों जैसे मिट्टी के बर्तन, ट्रे, कप, प्लेट, फूलदान आदि के अलावा स्टेशनरी सामानों पर भी मिथिला पेंटिंग का प्रचलन बढ़ा है। इससे कलाकारों के काम में वृद्धि हुई है।
संस्थापक राजेश कुमार ठाकुर ने कहा कि मिथिला पेंटिंग की बदौलत आज कई महिलाएं स्वाबलंबी बन चुकी हैं। नई पीढ़ी की बेटियां आज इस कला से अपना जीवन निखार रही है। यह काफी सुखद है। बेटियां अब किसी की मोहताज नहीं हैं। यह कला उनके सारे सपने पूरे कर सकती है।



