
MADHUBANI:- एक दशक से अतिक्रमण के चपेट में शहर का गोवा पोखर, मछली उत्पादन ठप,मूकदर्शक बना मत्स्य विभाग और रहिका अंचल प्रशासन
मधुबनी- 16 जुलाई। मधुबनी शहर का गोवा पोखर सालों से अतिक्रमण के चपेट में है। इसकी चिंता ना तो जिला मत्स्य विभाग को है और ना ही रहिका अंचल प्रशासन को। सालों से गोवा पोखर की जमीन पर अतिक्रमण बढ़ता गया। पोखर में पानी की जगह जलकुंभी व गंदगी होने से एक दशक से मछली उत्पादन नहीं हो रहा है। जिससे रहिका मत्स्यजीवी सहयोग समिति लि. को राजस्व का नुकसान हो रहा है। राजस्व नुकसान के प्रति जिला मत्स्य विभाग उदासीन बना है। वहीं, अतिक्रमित इस पोखर को अतिक्रमण खाली कराने के प्रति रहिका अंचल प्रशासन उदासीन बना है। जानकारों का माने तो स्थानीय चार दर्जन से अधिक लोगों ने गोवा पोखर की करीब एक बीधा जमीन अतिक्रमण कर रखा है।
अंचल प्रशासन द्वारा अतिक्रमित गोवा पोखर की जमीन को खाली कराने की पहल फाइलों में धूल फांक रहा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि जिला मत्स्य विभाग पोखर और जलकरों को सिर्फ बंदोबस्त करने में आगे रही है। लेकिनअतिक्रमित पोखर और जलकरों को अतिक्रमण खाली कराने में उदासीन बनी है। जिसका खामियजा अंचल के तीन दर्जन से अधिक पोखर-जलकरों को भुगतान पड़ रहा है।
रहिकाअंचल की पोखर-जलकरों की बदहाली को लेकर जिला मत्स्य विभाग और रहिका अंचल प्रशासन के रवैया के खिलाफ जन आंदोलन की सुगबुगाहट शुरु हो गई है। ऐसे में अतिक्रमित पोखर-जलकर की सीमांकन करअतिक्रमणकारियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होने से मामला और गहराता जा रहा है। बता दें कि पिछले कई सालों से गोवा पोखर के सौंदर्याकरण फाइल नगर निगम कार्यालय और रहिका अंचल कार्यालय का चक्कर लगता रहा है। पोखर सौंदर्गीकरण के लिए रहिका अंचल कार्यालय द्वारा पोखर का सीमांकन और अतिक्रमण मुक्त कराए बगैर दिसंबर 2025 में अनापत्ति प्रमाण पत्र नगर निगम कार्यालय को उपलब्ध कराई गई। इसके बाद सौंदर्याकरण कार्य अधर में लटका पड़ा है। बता दें कि पूर्व में गोवा पोखर सहित शहर के अन्य तीन पोखर के सौंदर्याकरण के लिए पांच करोड़ 47 लाख रुपये की बजट बनाई गई थी। जिसमें तिलक चौक तालाब, सूड़ी स्कूल तालाब और नगर निगम तालाब शामिल है।
तिलक चौक तालाब के भिंडा पर तत्कालीन नगर परिषद प्रशासन द्वारा मार्केट कांप्लेक्स निर्माण की योजना बनाई गई थी। इसके लिए मापी भी कराई गई थी। लेकिन अतिक्रमणकारियों के दबदबा के चलते मार्केट कांप्लेक्स का निर्माण नहीं हो सका। बता दें कि तिलक चौक तालाब से बड़ी मस्जिद जाने वाली सड़क किनारे तालाब के भिंडा पर एक दर्जन से अधिक चिकेन दुकानदारों ने सालों से कब्जा कर रखा है। इन दुकानदारों द्वारा खुले में चिकेन का व्यवसाय करते है। बड़े पैमान पर इसके अवशिष्ट को तालाब में फेंकते हैं।
बतादें कि सरेआम खुले में चिकेन काटना और इसकी बिक्री पर रोक का प्रावधान होने के बाद भी नगर निगम प्रशासन की नजर यहां तक नहीं पहुंच रही है। कहते है कि यहां के एक दबंग का चिकेन बिक्रेताओं को संरक्षण प्राप्त है।



