
मैथिल ब्राह्मणों का विश्व प्रसिद्ध वैवाहिक निर्धारण स्थल सौराठ सभा शुरु, 12 जुलाई तक चलेगी
मधुबनी- 02 जुलाई। मैथिल ब्राह्मणों का विश्व प्रसिद्ध वैवाहिक निर्धारण स्थल सौराठ सभा का सभावास इस साल मिथिला पंचांग के अनुसार 2 जुलाई से शुरु हो गया। सभा 12 जुलाई तक चलेगी। जिसका उद्घाटन जिला परिषद के पूर्व अध्यक्ष सतीश चन्द्र मिश्रा,जिला संस्कृति कार्यक्रम पदाधिकारी नीतीश कुमार, सौराठ सभा समिति के अध्यक्ष कृष्णकांत झा गुड्डू, समिति सचिव शेखर चन्द्र मिश्र ने संयुक्त रूप से किया। जिले के रहिका प्रखंड के सौराठ सभा परिसर में हर साल आषाढ़ में होने वाली सौराठ सभावास में मैथिल ब्राह्मण के वर व कन्या पक्ष के लोग पहुंचते हैं। यहां मूल-गोत्र के आधार पर वैवाहिक संबंध तय होते हैं।
सौराठ सभावास में बिहार और नेपाल से पहुंचते ब्राह्मण समाज—
सभावास में वर्तमान में मधुबनी, दरभंगा, सीतामढ़ी, समस्तीपुर, बेगूसराय, बेतिया, पूर्णिमा, कटिहार, मुजफ्फरपुर सहित बिहार के अन्य जिलों के अलावा नेपाल से ब्राह्मण समाज पहुंचते हैं।धोती-कुर्ता और सिर पर पाग में वर व कन्या पक्ष के लोग पहुंचते ही मिथिला की संस्कृति की झलक देखने को मिलती है। पूर्व यहां देश के विभिन्न भागों के गुरुकुल से गुरु व शिष्य पहुंचते थे। शास्त्रार्थ की परंपरा थी। अभिभावक बेटियों के लिए शिष्यों में से योग्य वर चुनते थे।
मिथिलाक्षर में शुरू हुआ पंजी प्रबंधन—
मैथिल ब्राह्मणों का सदियों पुराना वैवाहिक निर्धारण स्थल सौराठ सभा की परंपरा 14वीं शताब्दी से चली आ रही। यहां वंशावली विशेषज्ञ ‘पंजिकार’ के माध्यम से वर, कन्या दोनों पक्षों के सात पीढ़ियों तक के रक्त संबंधों की जांच की जाती है। ताकि समगोत्र में वैवाहिक संबंध से बचा जा सके। मिथिला के कर्णाट वंश के राजा हरिसिंह देव ने सौराठ सभा की शुरुआत कराई थी। तब पंजी प्रथा का प्रचलन नहीं था। लोग छिटपुट वंश परिचय रखते थे। बाद में मिथिलाक्षर में पंजी प्रबंधन शुरू हुआ। पंजीकार वंश परिचय का अभिलेख रखने लगे। यह परंपरा आज भी जारी है। पंजीकार प्रमोद कुमार मिश्र का कहना है कि सौराठ सभा में आधा दर्जन पंजीकार हैं। पंजीकार पंजी लेखन करते हैं। एक पंजीकार के पास सात से आठ सौ गांवों की जिम्मेदारी होती है। एक पंजी में 500 से अधिक लोगों की सात से अधिक पीढिय़ों की वंशावली का विवरण रहता है।



