
MADHUBANI:- सरकारी राशि की बर्बादी, विवाद में फंसा 1.69 करोड़ का ड्राइविंग ट्रैक, अब इसे ‘अनुपयोगी’ बताकर पल्ला झाड़ रहे हाकिम
“वाहन ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक का निर्माण के बाद उसे परिवहन विभाग हैंडओवर नहीं ले रहा है। 1.69 करोड़ की बर्बादी की जवाबदेही किसकी होगी? परिवहन मंत्री और क्षेत्र के सांसद, विधायक भी ट्रैक की हालत पर चुप्पी साधे है।”
मधुबनी- 19 अगस्त। सरकारी राशि की बर्बादी का बड़ा मसला शहर में देखने को मिल रहा है। शहर के गंगासागर चौक स्थित वाहन ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक करीब 2 साल से बदहाल पड़ा है। 1.69 करोड़ की लागत से बना ट्रैक अब सरकारी फाइल बनकर रह गया है। 2 साल से बंद इस ट्रैक को लेकर हाकिमों का पक्ष साफ नहीं हो सका है। इधर, सूत्रों का माने तो ट्रैक की जमीन विवाद में फंसने के बाद अब हाकिमों अंदर खाने में ट्रैक को अनुपयोगी बताकर इस पूरे झमेले से अपना पल्ला झाड़ लिया है।
1.69 करोड़ सरकारी राशि खर्च के बाद भी ट्रैक का उपयोग शून्य—
बतादें कि शहर के गंगासागर चौक स्थित दो साल पूर्व करीब 69 लाख के ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक निर्माण कार्य शुरु किया गया। इसी बीच करीब 1 करोड की लागत से चहारदीवारी का निर्माण कार्य शुरु किया गया। ट्रैक और चहारदीवारी पर 1 करोड़ 69 लाख खर्च होने के बाद भी ट्रैक आज तक एक बार भी इस्तेमाल नहीं हो सका। 1.69 ट्रैक का उपयोग शून्य है।
जमीन विवाद में फंसा ट्रैक—
सूत्रों का माने तो ट्रैक जिस जमीन पर ट्रैक बना है वह राज दरभंगा और बिहार राज्य पथ परिवहन निगम के बीच विवादित है। जिससे जिला प्रशासन ट्रैक को हैंडओवर लेने से कतरा रहा है। विवादित जमीन पर 1.69 करोड़ खर्च किए गए। जमीन की जांच और एनओसी की अनदेखी कर अब प्रशासन ट्रैक को अनुपयोगी बताकर जिम्मेदारी से बच रहा है।
सरकारी राशि का दुरुपयोग मामला ले जाएंगे हाई कोर्ट—
कांग्रेस पार्टी नेता विपिन कुमार झा ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जब ट्रैक का निर्माण के बाद उसे विभाग हैंडओवर नहीं ले रहा है। 1.69 करोड़ की बर्बादी की जवाबदेही किसकी होगी। इस पर परिवहन मंत्री और क्षेत्र के सांसद, विधायक भी ट्रैक की हालत पर चुप्पी साधे है? सरकारी संपत्ति की बर्बादी को लेकर मामला हाई कोर्ट ले जाया जाएंगे। उन्होंने कहा यह जांच का विषय है कि ट्रैक के लिए करोड़ों खर्च के बाद उसे अनुपयोगी बताना जनता के पैसे की लूट है। लर्निंग लाइसेंस धारकों को टेस्ट के लिए हाकिमों और बिचौलियों को एक तय राशि चढावा देना पड़ता है।
ड्राइविंग टेस्ट के लिए ट्रैक बना असामाजिक तत्वों का ठिकाना—
ड्राइविंग टेस्ट देने के लिए बनाया ट्रैक असामाजिक तत्वों का ठिकाना बन गया है। शाम होते ही यहां नशेड़ियों और जुआरियों का जमावड़ा लग जाता है। ट्रैक के अंदर गंदगी, टूटी बैरिकेडिंग और शराब की बोतलें मिलना आम बात हो गई है। ट्रैक पर करोड़ों खर्च के बाद धरातल पर नतीजा शून्य है।



