
MADHUBANI: शहर के अतिक्रमित 32 सरकारी तालाबों का मामला दर्ज, 12 मई को होगी सुनवाई
“सस्कारी तालाबों को अतिक्रमण मुक्त, मापी, सीमांकन और सौंदर्यीकरण को लेकर अधिवक्ता राकेश रंजन झा ने जिला लोक शिकायत निवारण कार्यालय में दर्ज कराया एक मामला”
मधुबनी – 2 मई। नगर निगम क्षेत्र के अतिक्रमित 32 सस्कारी तालाबों को अतिक्रमण मुक्त कराने के साथ इसके सौंदर्यीकरण की कानूनी पहल शुरु हो गई है। इस संदर्भ में व्यवहार न्यायालय के अधिवक्ता राकेश रंजन झा ने जिला लोक शिकायत निवारण कार्यालय में एक मामला दर्ज कराया है। इसकी सुनवाई 12 मई को निर्धारित की गई है। दर्ज मामले में अधिवक्ता ने बताया है कि निगम क्षेत्र के 32 तालाब अतिक्रमित हैं।स्थानीय लोगों ने अवैध रुप से घर, दुकान और प्रतिष्ठान बना रखा है। मिट्टी भराई का कार्य भी किया गया है। कई तालाबों में स्थानीय लोगों द्वारा गंदगी-कचड़ा भी फेका जाता है। लोगों के घर का गंदा पानी तालाब में ही बहाया जाता है।लेकिन नगर निगम के पदाधिकारी अतिक्रमित तालाबों को अतिक्रमण मुक्त करने की दिशा में कोई विशेष पहल नहीं कर रहे हैं। ना ही तालाबों की उड़ाही की जा रही है और न ही उनमें से कचड़ा, गाद, जल कुंभी आदि को निकाला जा रहा है। कई तालाबों में लोग गंदगी और कुड़ा-करकट भी फेक देते है, मगर उसे रोकने के लिए भी नगर निगम प्रशासन कोई प्रयास नहीं कर रहा है। जिससे प्रतीत होता है कि सरकारी पदाधिकारी सरकारी तालाब व उसकी जमीन की रक्षा करने में अभिरुचि नहीं रख रहे हैं।
शिकायत पत्र में अधिवक्ता ने बताया है कि नगर निगम क्षेत्र का जल स्तर दिनों-दिन गिरता जा रहा है, किंतु नगर निगम पारंपरिक जल श्रोतों की रक्षा न करके वर्षा जल संचयन व संरक्षण के प्रति पूरी तरह से उदासीन है। इनमें से कई सरकारी तालाबों के किनारों पर गंदगी, कचड़ा भरे हुए हैं, जिनकी समुचित साफ-सफाई नहीं की जा रही है। निगम प्रशासन द्वारा वर्ष में सिर्फ एक बार छठ महापर्व के समय इन तालाबों के घाटों की साफ-सफाई करवाया जाता है। छठ बाद साल भर इन तालाबों की कोई सुध-बुध नहीं लिया जाता।निगम के सरकारी तालाबों का पक्का घाट का निर्माण, बिजली पोल, लाइट और लोगों के बैठने की व्यवस्था जैसी नागरिक सुविधा पर ध्यान नहीं दे रहा है। तालाबों की साफ-सफाई नहीं की जा रही है।देख-रेख और साफ-सफाईको अभाव में इन तालाबों का जल दूषित हो गया है। इन तालाबों में मछली पालन, मखाना उत्पादन कार्य भी सही ढंग से नहीं हो पा रहा है। दूषित एवं गंदे जल कई तरह की बीमारियां एवं महामारी फैलने की आशंका बनी रहती हैं। जबकि ‘जल-जीचन हरियाली योजना’ ‘अमृत मिशन 2.0’ तथा ‘शहरी क्षेत्र सौदर्याकरण योजना’ के तहत नगर निगम, मधुबनी तालाबों का संरक्षण और जीर्णोद्धार कर सकता है। लेकिन इसमें लापरवाही और मनमानी बरती जा रही है। जिसके कारण तालाबों का अतिक्रमण भी दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है। आवेदन में निगम क्षेत्र के सभी सरकारी तालाबों की मापी व सीमांकन करवाकर अतिक्रमणमुक्त कराने की मांग की गई है।



