विश्व

ईरान में रिकॉर्ड इंटरनेट ब्लैकआउट, 456 घंटे से अधिक समय से 8.5 करोड़ लोग बाहरी दुनिया से कटे

तेहरान- 19 मार्च। ईरान में जारी इंटरनेट प्रतिबंध अब ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है, जिससे देश की लगभग पूरी आबादी वैश्विक संपर्क से कट गई है। इंटरनेट मॉनिटरिंग संस्था ‘नेटब्लॉक्स’ के अनुसार यह शटडाउन 20वें दिन में प्रवेश कर चुका है और 456 घंटे से अधिक समय से आम नागरिकों की अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट तक पहुंच पूरी तरह बाधित है।

नेटब्लॉक्स ने इसे ईरान के इतिहास का सबसे लंबा इंटरनेट ब्लैकआउट बताया है। इससे पहले जनवरी में हुए विरोध-प्रदर्शनों के दौरान भी इंटरनेट पर पाबंदियां लगाई गई थीं लेकिन इस बार की अवधि उससे भी अधिक लंबी हो गई है। अनुमान है कि करीब 8.5 करोड़ ईरानी नागरिक इस प्रतिबंध के कारण वैश्विक सूचना और संचार से पूरी तरह कट चुके हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार यह इंटरनेट बंदी केवल तकनीकी नहीं बल्कि एक रणनीतिक और सुरक्षा से जुड़ा फैसला है। माना जा रहा है कि सरकार जारी युद्ध के दौरान संवेदनशील सूचनाओं, तस्वीरों और वीडियो को बाहर जाने से रोकना चाहती है। खास तौर पर साउथ पार्स और अंजली बंदरगाह जैसे अहम ठिकानों पर हुए हमलों से जुड़ी जानकारी के लीक होने की आशंका को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।

इसके अलावा इंटरनेट बंद कर आंतरिक विरोध प्रदर्शनों और उनके समन्वय को भी कमजोर करने की कोशिश की जा रही है, ताकि किसी भी तरह के असंतोष को फैलने से रोका जा सके।

ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार ने कुछ संस्थानों के लिए सीमित इंटरनेट एक्सेस की व्यवस्था की है। ‘व्हाइट लिस्ट’ या नियंत्रित इंटरनेट के तहत कुछ विश्वविद्यालयों और चुनिंदा संस्थानों को आंशिक रूप से ऑनलाइन सेवाओं की अनुमति दी गई है।

इसी के चलते देर रात कुछ यूजर्स को सीमित समय के लिए कुछ प्लेटफॉर्म्स तक पहुंच मिल पाई, हालांकि यह सुविधा बहुत सीमित है और आम नागरिकों के लिए इंटरनेट सेवाएं अब भी लगभग पूरी तरह बंद हैं।

लंबे समय तक इंटरनेट बंद रहने से न केवल संचार बाधित हुआ है बल्कि सूचना के स्वतंत्र प्रवाह और अभिव्यक्ति की आजादी पर भी गंभीर प्रभाव पड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक जारी रहती है, तो इसका असर देश की अर्थव्यवस्था, शिक्षा और सामाजिक जीवन पर भी व्यापक रूप से पड़ेगा।

मौजूदा हालात में ईरान वैश्विक डिजिटल नेटवर्क से लगभग अलग-थलग पड़ गया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ती जा रही है।

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