बिहार

देश के CJI सूर्यकांत ने पटना हाईकोर्ट भवन के विस्तार की रखी आधारशिला, मौके पर बोले, कहा- बिहार की भूमि न्याय को लंबे समय से एक नैतिक और सामाजिक सिद्धांत के रूप में समझा जाता रहा है, जो सहानुभूति और साझा जिम्मेदारी से आकार लेता है

पटना- 03 जनवरी। उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने न्यायिक सेवा में आने वाली नयी पीढ़ी को आज आगाह किया कि उन्हें न्याय दिलाने में जल्दबाजी से बचना चाहिए तथा सहानुभूति और निर्णय की सटीकता के मानदंडों से कतई समझौता नहीं करना चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश ने शनिवार को पटना उच्च न्यायालय परिसर के विस्तार की कई परियोजनाओं की आधारशिला रखी जिनकी कुल लागत करीब 302 करोड़ रुपए होगी। इन परियोजनाओं में एक वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) केंद्र, एक सूचना प्रौद्योगिकी ब्लॉक, एक मल्टी-लेवल पार्किंग सुविधा, एक अस्पताल भवन, एक ऑडिटोरियम, न्यायिक अधिकारियों के लिए आवासीय क्वार्टर और एडवोकेट जनरल के कार्यालय के लिए एक एनेक्सी शामिल हैं। इन सभी सुविधाओं का उद्देश्य अदालत के कामकाज को आधुनिक बनाना, लॉजिस्टिक्स की बाधाओं को कम करना और मुकदमों के लिए न्याय तक पहुंच में सुधार करना है।

इस मौके पर जजों, वकीलों और अधिकारियों को संबोधित करते हुए, न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने जनसंख्या वृद्धि और तेजी से बढ़ते जटिल विवादों के साथ तालमेल बिठाने के लिए न्यायिक क्षमता का विस्तार करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचा सिर्फ इमारतों के बारे में नहीं है, बल्कि एक ऐसी न्याय प्रणाली बनाने के बारे में है, जो समाज की जरूरतों के साथ विकसित होने के लिए पर्याप्त लचीली हो। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि बिहार एक ऐसी भूमि है जहां जहां न्याय को लंबे समय से एक नैतिक और सामाजिक सिद्धांत के रूप में समझा जाता रहा है, जो सहानुभूति और साझा जिम्मेदारी से आकार लेता है।

उन्होंने कहा कि एक न्यायपूर्ण कानूनी प्रणाली को जानबूझकर उन समुदायों की ओर झुकना चाहिए जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है।

बार के युवा सदस्यों को एक स्पष्ट संदेश में,मुख्य न्यायाधीश ने ऐसी कार्य संस्कृति के प्रति आगाह किया, जो संतुलन के लिए कोई जगह नहीं छोड़ती। उन्होंने कहा कि कानूनी करियर की शुरुआत में तीव्रता आवश्यक हो सकती है, लेकिन यह सहानुभूति और सही निर्णय की कीमत पर नहीं होनी चाहिए-ये वही गुण हैं जिन पर न्याय निर्भर करता है।

समारोह में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और राजेश बिंदल, साथ ही पटना उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश, वकील और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हुए। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सुधीर सिंह भी मौके पर मौजूद थे, जबकि पटना उच्च न्यायालय के नव नियुक्त मुख्य न्यायाधीश संगम कुमार साहू, इस कार्यक्रम में आभासी माध्यम शामिल हुए।

उल्लेखनीय है कि एडीआर केंद्र से त्वरित, सौहार्दपूर्ण समाधान को बढ़ावा मिलने और कोर्टरूम पर दबाव कम होने की उम्मीद है, जबकि आईटी भवन डिजिटल सिस्टम और ई-कोर्ट पहलों को मजबूत करेगा। अस्पताल और पार्किंग कॉम्प्लेक्स जैसी सुविधाएं जजों, वकीलों और कोर्ट कर्मचारियों द्वारा सामना की जाने वाली लंबे समय से चली आ रही व्यावहारिक चुनौतियों का समाधान करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

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