
बिहार में नगर निकायों के नियम बदले, विज्ञापन टैक्स खत्म, अब लगेगी फीस, भवन नक्शा होगा ऑटो-अप्रूव्ड
पटना, 03 नवंबर। बिहार सरकार ने बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 में बड़ा संशोधन करते हुए अध्यादेश जारी किया है। राज्यपाल ले. जनरल सैयद अता हसनैन द्वारा प्रख्यापित यह अध्यादेश 29 अक्टूबर के असाधारण गजट में प्रकाशित हुआ है। विधानसभा सत्र में नहीं होने के कारण अनुच्छेद 213(1) के तहत यह अध्यादेश लाया गया है।
अब किसी नगरपालिका क्षेत्र की सीमा में बदलाव (जोड़ना, हटाना, विभाजन, विलय) या पुनर्गठन की अधिसूचना तब तक जारी नहीं होगी जब तक मौजूदा निकाय का शेष कार्यकाल 6 महीने या उससे कम न हो। इसका उद्देश्य चुनाव को एक साथ कराना है। (धारा 8 संशोधन)
मुख्य पार्षद सशक्त स्थायी समिति का प्रमुख होगा। सभी कार्यकारी शक्तियां इसी समिति में निहित होंगी। बैठक महीने में दो बार, पहले और तीसरे सोमवार को होगी। (धारा 27-A)
मुख्य नगरपालिका पदाधिकारी ही नगरपालिका का प्रधान कार्यपालक अधिकारी होगा। उसके द्वारा धारा 38 के तहत नियुक्त कर्मियों का ट्रांसफर-पोस्टिंग और अनुशासनात्मक कार्रवाई का अधिकार उसी को होगा। प्रतिनियुक्त सरकारी कर्मियों पर यह लागू नहीं होगा। (धारा 27-B)
राज्य सरकार किसी अधिकारी को नगरपालिका के किसी विभाग/काम की जांच के लिए प्रतिनियुक्त कर सकती है। जिले के DM भी स्वयं या सरकार के निर्देश पर जांच शुरू कर सकते हैं, रिपोर्ट मंगा सकते हैं। जांच अधिकारी का पद नगर निगम और Class A/B परिषद के लिए Deputy Secretary से नीचे नहीं, Class C/नगर पंचायत के लिए Under Secretary से नीचे नहीं होगा। (धारा 66)
101वें संविधान संशोधन (GST) के बाद विज्ञापन पर टैक्स का अधिकार खत्म होने से अब Advertisement Tax को Advertisement Fee किया गया है। अब यह सार्वजनिक स्थल के उपयोग के विशेषाधिकार के बदले फीस होगी। धारा 127(f) हटाया गया, अध्याय XVII का शीर्षक बदला गया।
अब आर्किटेक्ट का रजिस्टर राज्य सरकार ऑनलाइन रखेगी। पुराने नगरपालिका से निबंधित आर्किटेक्ट 6 महीने तक अधिकृत माने जाएंगे।
Municipal Building Code का नाम अब Bihar Building Byelaws होगा।
यदि क्षेत्र मिक्स्ड-यूज जोन घोषित है या भवन मिक्स्ड-यूज स्वीकृत है तो अलग से अनुमति नहीं लेनी होगी। भवन और गैर-आवासीय उपयोग का लाइसेंस ऑनलाइन ऑटोमैटिक जारी हो सकेगा। (धारा 338, 340, 342)
कई जगह ‘अपराध / offence’ शब्द को ‘उल्लंघन / contravention’ और ‘दंडित / punished’ को ‘शास्ति अधिरोपित / penalized’ किया गया है। धारा 398 से 403 और 423 को पूरी तरह विलोपित किया गया है।
विज्ञापन फीस न देने पर 2 गुना, नोटिस के बाद भी जारी रखने या दोहराव पर 3 गुना और सार्वजनिक सुरक्षा/यातायात/फायर सेफ्टी वाले स्थान पर लगाने पर 5 गुना तक जुर्माना, साथ में हटाने का खर्च भी वसूला जाएगा। 7 दिन का शोकॉज नोटिस जरूरी, 30 दिन में अपील का प्रावधान। (धारा 431) यह अध्यादेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।



