
मधुबनी में अतिक्रमण बना दबंगों का कमाई का जरिया, हर महीने लाखों की वसूली, निगम लाचार
मधुबनी- 31 अक्टूबर। शहर में अतिक्रमण धीरे-धीरे अवैध कमाई का बड़ा जरिया बन चुका है। शहरी क्षेत्र में अतिक्रमणकारियों को संरक्षण देने वालों द्वारा प्रतिमाह लाखों रुपये की वसूली की जा रही है। प्रशासनिक स्तर पर जैसे ही अतिक्रमण हटाने की सुगबुगाहट शुरू होती है, संरक्षणदाता प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल देते हैं और दबाव कम पड़ते ही फिर से वही गोरखधंधा शुरू हो जाता है।
फुटपाथ से लेकर मुख्य सड़क तक कब्जा—
शहर के गंगासागर चौक, प्राइवेट बस स्टैंड, स्टेशन चौक, थाना चौक, परिषद बाजार चौक, मंहथीलाल चौक, शंकर चौक, बाटा चौक, गिलेशन बाजार, बड़ा बाजार सहित अधिकांश हिस्सों में सुबह से ही फुटपाथी विक्रेता सड़क का अतिक्रमण कर दुकानें सजा देते हैं। चाय-नाश्ता, कपड़े, सब्जी सहित अन्य विक्रेता वर्षों से जमे हैं, जिससे दिन भर जाम की समस्या बनी रहती है।
शहरवासियों का सवाल है कि अतिक्रमणकारियों से प्रतिदिन होने वाली वसूली का पैसा आखिर किसकी जेब में जाता है। स्ट्रॉम वाटर ड्रेनेज प्रोजेक्ट भी अतिक्रमण की चपेट में शहर को जलजमाव से मुक्त करने के लिए लागू महत्वाकांक्षी स्ट्रॉम वाटर ड्रेनेज प्रोजेक्ट भी अतिक्रमण की मार झेल रहा है। नालों का अतिक्रमण आम बात हो गई है।
अब तक की कार्रवाई सिर्फ दिखावा—
पूर्व में हुई अतिक्रमण खाली की कार्रवाई महज दिखावा साबित हुई है। यह कार्रवाई थाना चौक से समाहरणालय होकर हास्पिटल चौक, कोतवाली चौक तक ही सिमट कर रह गई। अतिक्रमण हटाने के दूसरे ही दिन फिर से कब्जा जमा लिया जाता है। प्रशासन द्वारा नियमित कार्रवाई नहीं होना बड़ा सवाल बना हुआ है।
शहरवासियों को उम्मीद है कि इस बार जिला प्रशासन और नगर निगम प्रशासन अतिक्रमण के खिलाफ निर्णायक पहल करेगा, जिसका लाभ पूरे शहर को मिल सकेगा।



