
चुनाव में हार-जीत होती रहती है, संजय कुमार झा की राजनीतिक हैसियत पर सवाल उठाना ओछी मानसिकता: नजरे आलम
JDU के वजूद पर सवाल उठाने वालों को समय देगा जवाब, एक चुनाव के नतीजे से न पार्टी खत्म होती है, न किसी नेता का राजनीतिक कद तय होता है
दरभंगा- 29 अक्टूबर। जनता दल यूनाइटेड के नेता नजरे आलम ने बिहार विधान परिषद चुनाव के नतीजों के बाद जदयू और पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा को निशाना बनाकर की जा रही बयानबाजी पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव के दौरान हार-जीत लगी रहती है, लेकिन किसी चुनाव में कुछ सीटों पर हार के आधार पर जदयू का वजूद खत्म होने या संजय कुमार झा की राजनीतिक हैसियत पर सवाल उठाना राजनीतिक अपरिपक्वता और ओछी मानसिकता का परिचायक है।
नजरे आलम ने कहा कि कुछ लोग यह कहकर राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं कि संजय कुमार झा अपने ही मिथिला क्षेत्र में उम्मीदवारों को नहीं जिता पाए या उन्हें अपनी राजनीतिक हैसियत का पता चल गया। सवाल यह है कि क्या किसी एक चुनाव का परिणाम किसी अनुभवी नेता के पूरे राजनीतिक जीवन और संगठनात्मक योगदान का पैमाना हो सकता है? चुनावी नतीजों की समीक्षा जरूर होनी चाहिए, लेकिन उसे व्यक्तिगत अपमान और राजनीतिक चरित्रहनन का माध्यम बनाना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि संजय कुमार झा का राजनीतिक कद किसी के बयान से न बढ़ता है और न घटता है। उनके नेतृत्व में जदयू ने संगठन को मजबूत करने और पार्टी को स्थापित करने की दिशा में काम किया है। पिछले बिहार विधानसभा चुनाव में जदयू की 85 सीटों पर जीत पार्टी के राजनीतिक आधार और संगठनात्मक क्षमता का महत्वपूर्ण उदाहरण है। ऐसे में एक विधान परिषद चुनाव के नतीजे के आधार पर पूरी पार्टी को समाप्त घोषित करना राजनीतिक समझ की कमी को दर्शाता है।
नजरे आलम ने कहा कि जदयू के खिलाफ अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करने वालों को यह नहीं भूलना चाहिए कि राजनीति में सम्मान और पहचान का महत्व होता है। जो लोग कभी जदयू से जुड़े रहे, पार्टी में उन्हें सम्मान और राजनीतिक अवसर मिले, यदि वही लोग आज व्यक्तिगत टिप्पणियों और अपमानजनक भाषा के सहारे अपनी राजनीति चमकाना चाहते हैं, तो यह उनकी अपनी राजनीतिक सोच को उजागर करता है। असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन असहमति के नाम पर किसी नेता की राजनीतिक हैसियत को लेकर अपमानजनक टिप्पणी करना उचित नहीं है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि विधान परिषद चुनाव के नतीजों पर जदयू गंभीरता से विचार करेगी, कमियों की समीक्षा करेगी और आने वाले समय में संगठन को और मजबूत करने के लिए काम करेगी। किसी भी राजनीतिक दल के लिए चुनावी नतीजों से सीखना जरूरी है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि विरोधियों के दावों को ही राजनीतिक सच्चाई मान लिया जाए।
नजरे आलम ने कहा कि जदयू के वजूद और संजय कुमार झा के नेतृत्व पर सवाल उठाने वालों को जवाब वक्त देगा। राजनीति में किसी की हैसियत व्यक्तिगत बयानबाजी से नहीं, बल्कि उसके काम, संगठन और जनता के बीच उसकी भूमिका से तय होती है। जदयू न खत्म हुई है और न किसी की बयानबाजी से खत्म होने वाली है।



