
करवा चौथ सिर्फ व्रत नहीं, अखंड सौभाग्य और प्रेम का महापर्व है : पं. ऋषिनाथ झा
मधुबनी – 26 अक्टूबर। सुहागिनों के महापर्व करवा चौथ को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। इस साल करवा चौथ 29 अक्टूबर को मनाया जाएगा। मिथिला के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. ऋषिनाथ झा ने बताया कि करवा चौथ केवल पति की लंबी उम्र का व्रत नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में दांपत्य प्रेम, समर्पण और विश्वास का प्रतीक है।
पं. झा ने कहा कि कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाने वाला यह व्रत माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए किया था। तब से यह परंपरा अखंड सौभाग्य के रूप में चली आ रही है। इस दिन निर्जला व्रत रखकर महिलाएं चांद को देखकर पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं।
पं. ऋषिनाथ झा के अनुसार, इस वर्ष पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:45 बजे से 7:05 बजे तक रहेगा। चंद्रोदय रात लगभग 8:20 बजे होने की संभावना है। चांद निकलने के बाद छलनी से चांद और फिर पति का चेहरा देखकर व्रत खोला जाता है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक युग में इस व्रत का स्वरूप बदला है, पर भावना वही है। पहले यह व्रत उत्तर भारत तक सीमित था, आज मिथिला सहित पूरे बिहार में भी बड़े उत्साह से मनाया जाता है। पति-पत्नी के बीच प्रेम और सम्मान बढ़ाने वाला यह व्रत आज के समाज के लिए और भी प्रासंगिक है।
उन्होंने बताया कि व्रत के दौरान महिलाओं को करवा माता की कथा सुननी चाहिए, शिव-पार्वती और गणेश की पूजा करनी चाहिए और मन में किसी के प्रति द्वेष नहीं रखना चाहिए। व्रत को श्रद्धा से करने पर अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।



