
MADHUBANI:- अकशपुरा में 14 नवंबर से 9 दिवसीय नवाह महायज्ञ, तैयारी तेज, शुक्रवार को होगी बैठक: विपिन झा
मधुबनी- 08 अक्टूबर। रहिका प्रखंड के अकशपुरा गांव में 14 नवंबर से प्रस्तावित 9 दिवसीय नवाह महायज्ञ की तैयारी जोरों पर है। इसे लेकर 9 अक्टूबर को अकशपुरा में आयोजन समिति की बैठक बुलाई गई है।
उक्त जानकारी देते हुए समिति के सचिव विपिन कुमार झा ने बताया कि नवाह अनुष्ठान को भव्य रूप से आयोजित करने के लिए तैयारी शुरू कर दी गई है। समिति के अध्यक्ष रमन चौधरी,सचिव विपिन कुमार झा,कोषाध्यक्ष गुड्डू झा,उप सचिव वैद्यनाथ झा सहित यज्ञ मंडप व्यवस्था में बिलटू सहनी,रामवृक्ष सहनी, वासुदेव सहनी,रामवृक्ष पासवान, नरेश पासवान,हरिनाथ सहनी, रघुनि पासवान, छुटकू सहनी सहित अन्य ग्रामीण जुटे हुए हैं।
नवाह की महिमा—
नवाह की महिमा पर प्रकाश डालते हुए सचिव विपिन कुमार झा ने कहा कि धर्म शास्त्रों में इसे “नवाह्न पारायण” और “अखंड हरिनाम संकीर्तन” कहा गया है। श्रीमद् भागवत पुराण में कहा गया है कि ‘कलौ तद्धरिकीर्तनात्’ अर्थात कलियुग में केवल हरि नाम संकीर्तन से ही मुक्ति संभव है। भागवत के 12वें स्कंध में यज्ञ और तप की जगह नाम-जप को ही सबसे बड़ा धर्म बताया गया है।
स्कंद पुराण और पद्म पुराण में नवाह्न यज्ञ का वर्णन करते हुए कहा गया है कि ‘नवाहं य: पठेद् भक्त्या हरिनाम परायणम्’ अर्थात जो भक्त 9 दिन तक भक्ति-भाव से हरिनाम का पारायण करता है, उसे अश्वमेध यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है। 9 अंक को पूर्णांक माना गया है। नारद पुराण के अनुसार जहाँ 9 दिन तक अखंड कीर्तन होता है, वहां भगवान स्वयं निवास करते हैं और इस दौरान किया गया अन्नदान पितरों को तृप्त करता है।
रामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास ने भी लिखा है कि ‘कलियुग केवल नाम अधारा, सुमिरि सुमिरि नर उतरहिं पारा’ जो नवाह का मूल मंत्र है। धर्मसिंधु और निर्णयसिंधु में नवाह को काम्य अनुष्ठान बताया गया है, जिसमें 9 दिन तक ब्रह्मचर्य, सात्विक भोजन और नित्य हवन का विधान है। विपिन कुमार झा ने कहा कि शास्त्रों के अनुसार कलियुग में नवाह ही सबसे बड़ा और सरल यज्ञ है, जिसमें भगवान भाव देखते हैं।



