
उत्तर कोरिया का अमेरिका पर बड़ा आरोप, परमाणु हथियारों के प्रसार से दुनिया को तबाही की ओर धकेल रहा है वाशिंगटन
मॉस्को- 29 सितंबर। उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका पर परमाणु हथियारों और तकनीकों के प्रसार को बढ़ावा देने का गंभीर आरोप लगाया है। कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (केसीएनए) द्वारा जारी विदेश मंत्रालय के एक मेमोरेंडम में कहा गया है कि अमेरिका की परमाणु ताकत बढ़ाने और परमाणु तकनीकों के प्रसार की कोशिशों से अंतरराष्ट्रीय परमाणु व्यवस्था कमजोर हुई है और दुनिया परमाणु तबाही के खतरे की ओर बढ़ रही है।
27 सितंबर के मेमोरेंडम में क्या है?
विदेश मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका की परमाणु हथियारों के प्रसार से जुड़ी गतिविधियां जारी रहीं तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। मंत्रालय ने अमेरिका को परमाणु हथियारों के ‘वर्टिकल प्रसार’ यानी हथियारों की संख्या और क्षमता बढ़ाने का मुख्य जिम्मेदार बताया है। मंत्रालय ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने परमाणु निरस्त्रीकरण से जुड़ी अपनी जिम्मेदारियों से पीछे हटते हुए अपनी परमाणु क्षमता बढ़ाई है।
AUKUS और सहयोगियों का जिक्र
उत्तर कोरिया ने विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के साथ AUKUS सुरक्षा साझेदारी के तहत परमाणु तकनीक साझा करने का मुद्दा उठाया है। प्योंगयांग का दावा है कि अमेरिका जापान, दक्षिण कोरिया, न्यूजीलैंड और कनाडा जैसे अन्य सहयोगियों को भी इस तरह के सहयोग में शामिल करना चाहता है।
मंत्रालय ने दक्षिण कोरिया को परमाणु पनडुब्बियों से संबंधित अमेरिकी मंजूरी को भी एशिया-प्रशांत क्षेत्र में परमाणु तकनीक के प्रसार का उदाहरण बताया। उसके अनुसार, इससे क्षेत्र की सैन्य और राजनीतिक स्थिति में अस्थिरता बढ़ेगी।
परमाणु परीक्षण फिर शुरू करने का आरोप
मेमोरेंडम में अमेरिका पर परमाणु परीक्षण दोबारा शुरू करने की तैयारी का भी आरोप लगाया गया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका ‘निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा’ का हवाला देकर परमाणु विस्फोट परीक्षण फिर शुरू करने की योजना बना रहा है, जबकि वह अन्य देशों के परमाणु परीक्षणों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय राय बनाने का प्रयास करता है।
साथ ही, अमेरिका पर अन्य देशों के क्षेत्रों में परमाणु हमले की क्षमता वाले हथियारों की तैनाती, दक्षिण कोरिया के साथ परमाणु सहयोग तंत्र विकसित करने और जापान को दी जाने वाली विस्तारित सुरक्षा में परमाणु घटक शामिल करने का भी आरोप लगाया गया है। मंत्रालय ने अंत में कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों में अंतरराष्ट्रीय परमाणु व्यवस्था गंभीर दबाव में है। ऐसी स्थिति में उत्तर कोरिया को वैश्विक शांति और रणनीतिक स्थिरता की रक्षा में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने की आवश्यकता है।



