बिहार

जातीय जनगणना को राजनीतिक एजेंडा न बनाए राजद : उमेश

पटना- 2 जून। जनता दल यूनाइटेड के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने जातीय गणना पर सर्वदलीय बैठक की सफलता का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि हमारे नेता मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इससे गांधी, लोहिया, जयप्रकाश नारायण एवं कर्पूरी के सामाजिक न्याय के सपने को साकार किया है।

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि स्वतंत्रता पूर्व 1931 में जातिगत जनगणना होने के समय बिहार एवं उड़ीसा में 23 से अधिक जातियां निवास करती थी। स्वतंत्र के बाद 1951 की जनगणना में अनुसूचित जाति एवं जनजाति के आकड़े तो आए पर ओबीसी एवं अन्य जातियों की वास्तविक संख्या सामने नहीं आया। मंडल आयोग की सिफारिश भी 1931 की जनगणना के आधार पर ही हुयी। नीतीश कुमार प्रारंभ से ही जातीय जनगणना की मांग करते रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जदयू के संसदीय कार्य मंत्री श्रवण कुमार की ओर से 18 फरवरी 2019 को रखे गए जाति आधारित जनगणना संबंधी प्रस्ताव को बिहार विधान मंडल ने पारित किया था और पुनः जदयू के नेतृत्व में 27 फरवरी 2020 को भी बिहार विधानसभा ने प्रस्ताव पारित करा कर केंद्र सरकार को भेजा गया।

प्रदेश अध्यक्ष ने राजद को आगाह किया कि जाति आधारित जनगणना को वो राजनीतिक एजेंडा नहीं बनाएं। क्योंकि, इससे समाज में फुट उत्पन्न होने के साथ ही बिहार का विकास अवरुद्ध होगा। यदि वास्तव में राजद को इतनी ही चिंता थी तो 2011 में यूपीए की ओर से कराए गए सामाजिक, आर्थिक एवं जाति जनगणना की रिपोर्ट क्यों नहीं प्रकाशित कराया, जबकि उस समय राजद यूपीए का एक महत्वपूर्ण घटक दल था।

उन्होंने कहा कि राजद हमारी पार्टी द्वारा किए गए प्रयासों का क्रेडिट लेकर राजनीतिक रोटी सेकने का प्रयास कर ऐसे संवेदनशील मामले में भी राजनीतिक लाभ प्राप्त करना चाहती है। बिहार की जनता उसके इस प्रवृत्ति से अवगत है।

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