भारत

वन संरक्षण में समुदायों की भागीदारी से प्रयास अधिक प्रभावी और स्थायी होंगे: राष्ट्रपति

नई दिल्ली- 17 जुलाई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि वनों की रक्षा में स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित किए बिना संरक्षण के प्रयास पूरी तरह सफल नहीं हो सकते। जब समुदाय स्वयं वन संरक्षण के भागीदार बनते हैं तो संरक्षण की पहल अधिक प्रभावी और दीर्घकालिक होती है।

राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में शुक्रवार को भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के प्रशिक्षु अधिकारियों से मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय वन सेवा के अधिकारी केवल वन प्रशासक नहीं, बल्कि देश की प्राकृतिक धरोहर के संरक्षक हैं। जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता के क्षरण जैसी वैश्विक चुनौतियों के दौर में उनकी भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने युवा अधिकारियों से वन क्षेत्र बढ़ाने पर विशेष ध्यान देने का आग्रह करते हुए कहा कि पृथ्वी पर जीवन की आधारशिला वन ही हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की वैध आकांक्षाओं के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है। विकास और संरक्षण को एक-दूसरे का विरोधी नहीं, बल्कि पूरक माना जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से ऐसे समाधान विकसित करने का आह्वान किया, जिनसे प्रकृति और स्थानीय समुदाय दोनों समान रूप से समृद्ध हो सकें।

उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदायों, वनवासियों, महिलाओं, किसानों और स्थानीय संस्थाओं के विचारों और चिंताओं को समझना बेहतर निर्णय लेने में सहायक होगा। संरक्षण, वन बहाली और आजीविका से जुड़े कार्यक्रमों में जनभागीदारी बढ़ाने पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि इससे वन संरक्षण के प्रयास अधिक टिकाऊ बनेंगे।

राष्ट्रपति ने कहा कि लोक सेवा का उद्देश्य लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना और राष्ट्र की प्रगति में योगदान देना है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए पारिस्थितिक सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है और उन्हें विश्वास है कि भारतीय वन सेवा के युवा अधिकारी देश के हरित, समावेशी और सतत विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

उल्लेखनीय है कि भारतीय वन सेवा के वर्ष 2024 और 2025 बैच के प्रशिक्षु अधिकारी वर्तमान में देहरादून स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी में व्यावसायिक प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। वर्ष 2024 बैच में 111 और वर्ष 2025 बैच में 131 प्रशिक्षु अधिकारी शामिल हैं। दोनों बैच में भूटान के दो-दो प्रशिक्षु अधिकारी भी प्रशिक्षण ले रहे हैं।

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