
शिक्षक ही राष्ट्र निर्माता, उनके सम्मान से ही संस्कार और संस्कृति सुरक्षित: आदित्य नारायण गुप्ता
मधुबनी- 02 अक्टूबर। विश्व शिक्षक दिवस (5 अक्टूबर) के अवसर पर संस्कार संस्कृति संरक्षण समिति के तत्वावधान में शहर के कीर्तन भवन रोड स्थित कार्यालय में ‘राष्ट्र निर्माता शिक्षक’ विषय पर सेमिनार आयोजित की जाएगी।
समिति के उपाध्यक्ष एवं सामाजिक कार्यकर्ता आदित्य नारायण गुप्ता ने बताया कि सेमिनार में शिक्षा और शिक्षकों के महत्व पर चर्चा होगी।
उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल किताबी ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि जीवन जीने की कला, संस्कार और चरित्र का निर्माण भी करते हैं। आज के दौर में जब संस्कृति और संस्कारों पर संकट है, ऐसे में शिक्षकों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है।
उन्होंने कहा कि एक शिक्षक समाज का दीपक है, जो खुद जलकर दूसरों को रोशनी देता है। यदि शिक्षक सशक्त होगा तो समाज सशक्त होगा और राष्ट्र सशक्त होगा। माता-पिता जन्म देते हैं, लेकिन शिक्षक जीवन को दिशा देता है।
आदित्य नारायण गुप्ता ने कहा कि विश्व शिक्षक दिवस यूनेस्को द्वारा 1994 से मनाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य शिक्षकों के सम्मान और उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाना है। भारत में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है, जबकि वैश्विक स्तर पर 5 अक्टूबर को यह दिवस मनाया जाता है।
उन्होंने सभी लोगों से अपील की कि 5 अक्टूबर को अपने गुरुओं को याद कर उनका सम्मान अवश्य करें।



