
नवरात्र विशेष: माँ दुर्गा के 9 रूपों को लगने वाले नैवेद्य का विशेष महत्व, जानें पं. ऋषिनाथ झा
मधुबनी – 10 अक्टूबर। नवरात्र में 9 दिन मां दुर्गा के 9 रूपों की पूजा के साथ-साथ उनके प्रिय भोग ‘नैवेद्य’ का भी विशेष महत्व है। पं. ऋषिनाथ झा ने बताया कि शास्त्रों में कहा गया है कि देवी को उनके प्रिय भोग चढ़ाने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
प्रथम दिन माँ शैलपुत्री को गाय के शुद्ध घी से बनी खीर या घी से चुपड़ा हुआ चावल। मान्यता है कि इससे स्वास्थ्य अच्छा रहता है और चंद्र दोष शांत होता है। इस दिन घी का दीया जलाकर घी का ही भोग लगाना चाहिए।
द्वितीय दिन माँ ब्रह्मचारिणी को शक्कर, मिश्री और पंचामृत का भोग लगाना चाहिए। इस दिन शक्कर का दान करना चाहिए। इससे ज्ञान, बुद्धि और लंबी आयु मिलती है।
तृतीय दिन माँ चंद्रघंटा को गाय के दूध, दही और दूध की खीर का भोग प्रिय है। इससे दुख और भय दूर होते हैं। चतुर्थ दिन माँ कूष्मांडा को मालपुआ का भोग सबसे प्रिय है। इस भोग से बुद्धि और निर्णय क्षमता बढ़ती है और आरोग्य की प्राप्ति होती है।
पंचम दिन माँ स्कंदमाता को केला का भोग लगाना चाहिए। केला संतान और स्वास्थ्य का प्रतीक है। षष्ठम दिन माँ कात्यायनी को शहद का भोग लगाना चाहिए। शहद के भोग से सुंदरता और आकर्षण बढ़ता है। सप्तम दिन माँ कालरात्रि को गुड़ और गुड़ से बनी खीर, लड्डू का भोग प्रिय है। गुड़ का भोग चढ़ाने से शत्रु और संकट दूर होते हैं और अकाल मृत्यु से रक्षा होती है।
अष्टम दिन माँ महागौरी को नारियल का भोग लगाना चाहिए। महाअष्टमी पर नारियल का भोग लगाने से पापों का क्षय होता है। नवम दिन माँ सिद्धिदात्री को तिल का हलवा, पूरी, चना और खीर का भोग लगता है। नवरात्र के अंतिम दिन हवन से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और घर में अन्न-धन की कमी नहीं रहती।



