
JDU में घमासान: Nitish के कभी आंख रहे छोटू सिंह 6 साल के लिए निष्कासित, कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा पर फोड़ा ठीकरा
पटना – 18 अक्टूबर। जनता दल यूनाइटेड (JD-U) में अंदरूनी कलह एक बार फिर सतह पर आ गई है। पार्टी के पुराने और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले अरविंद कुमार सिंह उर्फ छोटू सिंह को पार्टी ने 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया है। निष्कासन के बाद छोटू सिंह ने पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा पर गंभीर आरोप लगाए हैं, यहां तक कि नीतीश कुमार की मौजूदा राजनीतिक और स्वास्थ्य स्थिति के लिए भी उन्हें जिम्मेदार ठहराया है।
कौन हैं छोटू सिंह?
छोटू सिंह JD(U) के पुराने संगठनकर्ता रहे हैं। उन्हें नीतीश सरकार ने बिहार राज्य नागरिक परिषद का महासचिव बनाया था। पार्टी में कहा जाता था कि नीतीश मुख्यमंत्री थे तो पार्टी की अंदरूनी गतिविधियों की रिपोर्ट सीधे उन तक पहुंचाने वालों में छोटू सिंह सबसे भरोसेमंद थे। उन्हें वरिष्ठ मंत्री अशोक चौधरी का करीबी भी माना जाता है।
निष्कासन क्यों हुआ?
JD(U) प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा के आदेश पर 10 जुलाई को ये कार्रवाई हुई। पार्टी ने कारण बताया – पार्टी विरोधी गतिविधि।
पार्टी सूत्रों के अनुसार दो बातें हुईं:
1.नई प्रदेश कार्यकारिणी में 153 पदाधिकारियों की लिस्ट बनी, जिसमें छोटू सिंह को जगह नहीं मिली।
2.इसके बाद उनकी राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा से तीखी बहस हुई और उसके बाद से उन्हें पार्टी कार्यक्रमों और जनता दरबार से भी दूर रखा गया। बताते चलें कि 8 साल पहले भी MLC टिकट न मिलने पर उन्होंने इस्तीफा दिया था, बाद में वशिष्ठ नारायण सिंह के मनाने पर वापस आए थे।
कौन हैं संजय झा जिन पर आरोप लगे?
संजय कुमार झा मूल रूप से मधुबनी के झंझारपुर के रहने वाले हैं। JNU से पढ़े हैं। 2006 से 2012 तक BJP से विधान परिषद सदस्य रहे, फिर 2012 में JD(U) में आए। नीतीश सरकार में जल संसाधन मंत्री रहे और अभी राज्यसभा सांसद होने के साथ-साथ JD(U) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष हैं। पार्टी में उन्हें नीतीश के सबसे करीबी रणनीतिकार और भाजपा से समन्वय बनाने वाले नेता के तौर पर देखा जाता है।
आरोप में कितना दम?
छोटू सिंह का कहना है कि “नीतीश के आशीर्वाद के बिना ये लोग कुछ भी नहीं हैं” और संजय झा ने पार्टी पर कब्जा कर लिया है।
दूसरी तरफ पार्टी का आधिकारिक पक्ष सिर्फ इतना है कि अनुशासनहीनता पर कार्रवाई हुई है। संजय झा या पार्टी ने स्वास्थ्य संबंधी आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि JD(U) जैसी कैडर बेस्ड पार्टी में इस तरह की गुटबाजी नई नहीं है। आरोप व्यक्तिगत हैं और इनका कोई स्वतंत्र आधिकारिक सत्यापन नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में देखना होगा कि छोटू सिंह सुलह की राह पर जाते हैं या अलग राजनीतिक रास्ता अपनाते हैं।



