
JDU में अंदरूनी खींचतान की चर्चा, ‘जनता दल नीतीश’ के प्रस्ताव पर सियासी कयास, पार्टी में नए समीकरणों की अटकलें तेज
पटना- 06 अक्टूबर। बिहार विधान परिषद की पटना स्नातक सीट को लेकर जदयू के भीतर चल रही चर्चाओं के बीच पार्टी में नए सियासी समीकरणों के कयास लगाए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, पटना स्नातक सीट पर पार्टी प्रत्याशी को लेकर मोकामा विधायक की नाराजगी सामने आई है। इस मामले में पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने लखीसराय के घोसैठ में आयोजित सभा में स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की थी।
सियासी हलकों में कई तरह की चर्चाएं
इधर फरक्का जल संधि पर चल रही ‘नीतीश संवाद यात्रा’ और खगड़िया में पार्टी का नाम बदलकर ‘जनता दल नीतीश’ करने की मांग उठने के बाद सियासी हलकों में कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
JDU की पहचान जॉर्ज, कर्पूरी और शरद की विरासत से
राजनीतिक जानकारों के एक वर्ग के मुताबिक, जनता दल यूनाइटेड की पहचान जॉर्ज फर्नांडिस, कर्पूरी ठाकुर और शरद यादव की समाजवादी विरासत से रही है। इस पृष्ठभूमि में नाम बदलने के प्रस्ताव को वे विचारधारा से व्यक्ति-केंद्रित राजनीति की ओर बदलाव की चर्चा के तौर पर देख रहे हैं।
नीतीश की विरासत को नए सिरे से पेश करने की कोशिश
कुछ हलकों में यह भी चर्चा है कि फरक्का जैसे भावनात्मक मुद्दे पर 12 जिलों में यात्रा के जरिए नीतीश कुमार की विरासत को नए सिरे से पेश करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
उत्तराधिकार को लेकर सियासी कयास—
वहीं स्वास्थ्य मंत्री के मार्च 2026 में जदयू में शामिल होने और 18 सितंबर को पटना के कर्पूरी ऑडिटोरियम में पार्टी के आधिकारिक मंच पर दिखने के बाद उत्तराधिकार को लेकर सियासी कयास लगाए जा रहे हैं।
पूरी कवायद के पीछे एक वर्ग की सक्रियता
सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि इस पूरी कवायद के पीछे पार्टी के एक वर्ग की सक्रियता है। हालांकि इस संबंध में पार्टी की ओर से आधिकारिक तौर पर कोई बयान नहीं आया है।
दिसंबर 2026 में खत्म हो रही फरक्का संधि की मियाद
वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दिसंबर 2026 में फरक्का संधि की मियाद खत्म होने से पहले यह मुद्दा बिहार के हितों से जुड़ा अहम मुद्दा बन सकता है।



