
विश्व ओजोन दिवस पर बिहार प्रदूषण पर्षद में संगोष्ठी, इस वर्ष का विषय – “ठंडे ग्रह के लिए वैश्विक प्रयास”
पटना- 16 सितंबर। बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद, परिवेश भवन पाटलिपुत्र में विश्व ओजोन दिवस पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। पृथ्वी के समतापमंडल में स्थित ओजोन परत सूर्य से आने वाली घातक पराबैंगनी किरणों को रोकती है, इसके संरक्षण के लिए विश्व भर में जागरूकता अभियान चलाया जाता है। इस वर्ष की थीम – “शीतल ग्रह के लिए वैश्विक प्रयास” है।
कार्यक्रम का शुभारंभ पर्षद के सदस्य-सचिव नीरज नारायण,भाप्रसे ने किया। उन्होंने दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (CUSB) के पर्यावरण विज्ञान के प्रोफेसर प्रो. पार्थ सारथी का स्वागत करते हुए कहा कि अल्प लागत और बेहतर वैकल्पिक पदार्थों के उपयोग से ओजोन स्तर के परिरक्षण में काफी सहायता मिलेगी। मुख्य वक्ता प्रो. पार्थ सारथी ने वायुमंडल में ओजोन क्षयकारी पदार्थों के उपयोग से ओजोन स्तर में कमी की तकनीकी जानकारी दी।
पर्षद के वैज्ञानिक डॉ. नवीन कुमार ने व्याख्यान में बताया कि भारत सरकार ने मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के आलोक में “The Ozone Depleting Substances (Regulation and Control) Rules, 2000” अधिसूचित किया है, जिसके तहत ODS का उत्पादन, बिक्री, आयात-निर्यात विनियमित किया गया है। उन्होंने बताया कि 2016 के किगाली संशोधन में HFC के उपयोग को चरणबद्ध तरीके से कम करने का निर्णय लिया गया है, जो वैश्विक तापमान को रोकने में सहायक होगा। वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार अंटार्कटिका में ओजोन स्तर 2066 तक, आर्कटिक में 2045 तक और वैश्विक औसत के अनुसार 2040 तक 1980 के स्तर पर पुनः आ जाने की आशा है।
कार्यक्रम में पर्षद के सभी वैज्ञानिक, अभियंता, क्षेत्रीय कार्यालयों के पदाधिकारी मौजूद थे। पर्षद के वैज्ञानिक अरुण कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन किया।



